अंधेरे कमरे में जलती मोमबत्ती
शहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और शांत इलाके में रोहन अकेला रहता था। उसकी जिंदगी एक ऐसी मोमबत्ती की तरह थी जो बिना हवा के भी कांपती रहती थी। एक शाम जब अचानक पूरे मोहल्ले की बिजली चली गई, तो उसने अपनी खिड़की पर एक छोटी सी मोमबत्ती जलाई। तभी पड़ोसी बालकनी से किसी ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा। वह सिमरन थी, जो हाल ही में उस मकान में शिफ्ट हुई थी। उस दिन बिना किसी बात के दोनों के बीच लंबी आँख मिचौली वाली बातें शुरू हो गईं। अंधेरे ने उनके दिल के दरवाजों पर दस्तक दे दी थी और मोमबत्ती की रोशनी ने उनके बीच की दूरियों को हमेशा के लिए मिटा दिया।
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