खामोशियां

लबों पर हंसी सजाए रखते हैं सब के लिए, अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं अकेले। कोई तो समझे इस खामोशी की जुबान को, हम खुद से ही रोज बिछड़ते रहते हैं।

अधूरे ख्वाब

कुछ रास्ते खुद ब खुद मुड़ जाते हैं, दिल के अरमान आंसुओं में जुड़ जाते हैं। तन्हाइयों का सफर अब आसान लगता है, जब अपने ही बेगाने बन जाते हैं।

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अधूरे ख्वाब

कुछ रास्ते खुद ब खुद मुड़ जाते हैं, दिल के अरमान आंसुओं में जुड़ जाते हैं। तन्हाइयों का सफर अब आसान लगता है, जब अपने ही बेगाने बन जाते हैं।

खामोशियां

लबों पर हंसी सजाए रखते हैं सब के लिए, अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं अकेले। कोई तो समझे इस खामोशी की जुबान को, हम खुद से ही रोज बिछड़ते रहते हैं।

अधूरी चाय

तुम्हारी पसंद की वो कड़क चाय अब फीकी लगने लगी है, लगता है तुम्हारे जाने से हमारी सुबह की तासीर बदल गई है।

बिछड़े रास्ते

वक्त के साथ सब बदल गया यहां, हमारा साया भी अब हमसे रूठ गया। उम्मीदों की जो डोर थामी थी हमने, वो एक झटके में आज टूट गया।