श ShayariForYou
अंतिम उड़ान

अंतिम उड़ान

“
परिंदों को पिंजरे से कोई बैर नहीं होता,
उन्हें तो बस आसमान की चाहत होती है।
”
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

पाठकों की टिप्पणियाँ (Comments)

अभी कोई टिप्पणी प्रकाशित नहीं हुई है। पहले पाठक बनकर अपनी राय दें!

टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें।

संबंधित रचनाएँ (Related)

खयालों का शहर

अपनी ही धुन में बहता चला जा रहा हूँ मैं, अनजाने सफर में कुछ कहता जा रहा हूँ मैं। भीड़ बहुत है इस दुनिया के मेलों में मगर, खुद को ही ढूंढता हुआ रहता जा रहा हूँ मैं।
👁️ 1

बदलाव की बयार

पत्ते गिरते हैं तो शाखों को नया रंग मिलता है, हर अंधेरे के बाद ही तो नया उमंग मिलता है। यूं ही नहीं बिखरती है जिंदगी कभी यारों, संवरने का मौका भी बस तंगियों के संग मिलता है।
👁️ 4

अंझाना मोड़

कदमों के निशान छोड़ कर आगे बढ़ चले हम, जिंदगी के हर एक इम्तिहान से लड़ चले हम। जीत की चाहत में अपनों को जो खोया कभी, उसी कसक के साथ आगे बढ़ चले हम।
👁️ 1

अन्य लोकप्रिय संग्रह

सामग्री रिपोर्ट करें