#लाइफ शायरी
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खयालों का शहर
“
अपनी ही धुन में बहता चला जा रहा हूँ मैं, अनजाने सफर में कुछ कहता जा रहा हूँ मैं। भीड़ बहुत है इस दुनिया के मेलों में मगर, खुद को ही ढूंढता हुआ रहता जा रहा हूँ मैं।
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