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झूठ का कड़वा सच

राकेश अपने विद्यालय में हमेशा अपनी झूठी शान दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें किया करता था। उसके दोस्तों को उसकी इन बातों पर हंसी आती थी, पर वह अपनी आदत से बाज नहीं आया। एक दिन उसने मजाक में एक बड़ी मुसीबत आने की झूठी अफवाह फैला दी, जिससे पूरे गाँव में हड़कंप मच गया। जब लोगों को सच्चाई का पता चला, तो सबने राकेश से दूरी बना ली और उसकी बात पर विश्वास करना हमेशा के लिए बंद कर दिया। जब सचमुच एक दिन राकेश पर संकट आया, तो उसकी मदद करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया क्योंकि सब उसका झूठ समझ बैठे थे। तब उसे समझ आया कि झूठ की नींव पर कभी विश्वास का महल नहीं टिक सकता।

सच्चे मित्र की परख

एक छोटे से गाँव में सोहन और मोहन नाम के दो पक्के मित्र रहते थे। दोनों हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देते थे। एक दिन वे दोनों जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे, तभी अचानक उनके सामने एक खतरनाक भालू आ गया। सोहन बिना कुछ सोचे-समझे तुरंत पास के एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन मोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। मोहन ने मदद के लिए चिल्लाया, पर सोहन ने अपनी जान बचाते हुए उसकी कोई मदद नहीं की। मोहन ने तुरंत अपनी साँस रोक ली और जमीन पर लेट गया क्योंकि उसने सुन रखा था कि भालू मरे हुए इंसानों को नहीं खाता। भालू आया, मोहन को सूँघा और मरा हुआ समझकर आगे निकल गया। जब संकट टल गया, तब सोहन पेड़ से नीचे उतरा और हँसते हुए मोहन से पूछा कि भालू उसके कान में क्या फुसफुसा रहा था। मोहन ने बहुत ही शांत भाव से उत्तर दिया कि भालू ने मुझे समझाया है कि असली मित्र वही होता है जो संकट के समय अकेला छोड़कर नहीं भागता। सोहन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ी। इस घटना से मोहन को यह बड़ी सीख मिली कि सच्चे मित्रों की पहचान हमेशा मुसीबत के समय ही होती है।

लोभी बंदर की सीख

एक घने जंगल में एक चंचल बंदर रहता था। एक दिन उसे एक चमकीला और अनोखा कांच का जार मिला जिसके अंदर स्वादिष्ट बादाम रखे थे। बंदर ने जार में हाथ डाला और मुट्ठी में बहुत सारे बादाम भींच लिए। लेकिन जब उसने हाथ बाहर निकालना चाहा, तो बंद मुट्ठी जार के मुँह से बाहर नहीं आ पाई। वह जोर-जोर से खींचने लगा लेकिन जार नहीं छूटा। तभी वहाँ एक समझदार बूढ़ा बंदर आया और बोला कि यदि तुम कुछ बादाम छोड़ दोगे, तो तुम्हारा हाथ आसानी से बाहर आ जाएगा। बंदर ने वैसा ही किया और उसका हाथ तुरंत बाहर आ गया। इस घटना से उसे समझ आया कि अत्यधिक लालच हमेशा मुसीबत का सबब बनता है और संतोष ही सबसे बड़ा धन है।

चाय का नशा

हमारी रगों में खून कम और चायपत्ती का काढ़ा ज्यादा दौड़ता है, तभी तो हर मुसीबत का इलाज सिर्फ एक कप चाय है।

दिल की गहराइयां

लफ्जों की जरूरत उसे कहां पड़ती है, हमारी खामोशी भी जो शख्स पढ़ लेती है। खुदा ने बख्शी है हमें एक ऐसी दौलत, जो हर मुसीबत में हमारे आगे खड़ी रहती है।

फरिश्तों का साया

मुसीबत के वक्त जो बिना बुलाए आ जाए, पीठ पीछे जो हमेशा हमारी ढाल बन जाए। ऐसे दोस्तों को फरिश्ता ही कहना चाहिए यारों, जो हर मोड़ पर दुआओं की मिसाल बन जाए।