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बक्से में बंद ख्वाब

मीरा ने जब घर की सफाई के दौरान अलमारी के सबसे निचले हिस्से में लकड़ी का वह पुराना बक्सा खोला, तो धूल की एक परत के साथ कई दबे हुए अरमान भी बाहर आ गए। उस बक्से में उसके कॉलेज के दिनों के स्केच, अधूरे गीत और कुछ रंग-बिरंगे धागे थे। एक वक्त था जब वह चित्रकार बनना चाहती थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और सामाजिक बंधनों ने उसके सारे सपने एक बक्से में कैद करवा दिए। उसने उन कागजों को अपने हाथों से छुआ और उसकी आँखें नम हो गईं। तभी उसकी पोती दौड़ती हुई आई और उसने मीरा के पुराने रंगों को देखकर पेंटिंग बनाने की जिद पकड़ ली। मीरा ने अपनी पोती का हाथ थामा और ब्रश उठाया, मानो उसका टूटा हुआ सपना आज किसी नई रोशनी के साथ फिर से जिंदा हो उठा हो।

अल्मारी के कोने में रखी पुरानी घड़ी

दीपावली की सफाई के दौरान जब अनाहिता ने घर के पुराने स्टोर रूम की सफाई शुरू की, तो उसकी नजर लकड़ी की एक पुरानी संदूकची पर पड़ी। उसने धूल झाड़कर उसे खोला तो अंदर उसके दादाजी की कलाई पर बंधने वाली वह पुरानी टिक-टिक करती घड़ी मिली, जो सालों पहले बंद हो गई थी। अनाहिता ने उसे उठाया और जैसे ही उसने उसकी चाबी घुमाने की कोशिश की, अचानक से घड़ी की सुइयां हिलने लगीं और उसकी पुरानी टिक-टिक की आवाज गूंज उठी। उस आवाज के साथ ही बचपन की वे तमाम यादें ताजा हो गईं जब दादाजी उसे पार्क ले जाया करते थे और अपनी कलाई की घड़ी दिखाकर उससे समय पूछा करते थे। अनाहिता की पलकें नम हो गईं और उसने घड़ी को अपने सीने से लगा लिया। उस एक पल में बीता हुआ पूरा बचपन जैसे फिर से लौट आया हो।

रंगों की नई पहचान

चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राहुल ने कई महीनों तक मेहनत की थी। जब परिणाम आया, तो उसे कोई पुरस्कार नहीं मिला। वह बहुत निराश हुआ और उसने अपने सारे रंग और ब्रश एक कोने में रख दिए। तभी उसकी छोटी बहन उसके पास आई और उसने उन रंगों से एक बेतरतीब सी पेंटिंग बनाई, जिसमें कोई नियम नहीं था लेकिन बहुत सारे जीवंत रंग थे। उसने राहुल से कहा कि कला नियमों में बंधने के लिए नहीं, बल्कि दिल की भावनाएं व्यक्त करने के लिए होती है। बहन की इस बात ने राहुल की आँखें खोल दीं। उसने अगले साल फिर से नए जोश के साथ हिस्सा लिया और इस बार उसने प्रथम पुरस्कार जीता।

रंगों का बंधन

होस्टेल के उस कमरे में रंगों की खुशबू फैली हुई थी और हर तरफ गुलाल बिखरा हुआ था। अनमोल इस बात से डरता था कि कोई उसके करीब आकर उसे रंग न लगा दे, क्योंकि वह भीड़ से दूर रहना पसंद करता था। तभी नयना हाथ में नीले और गुलाबी रंग की थाली लेकर तेजी से कमरे में घुसी और सीधे अनमोल के गालों पर रंग मल दिया। अनमोल ने चौंककर देखा तो सामने नयना की खिलखिलाती हुई हँसी थी, जिसमें किसी प्रकार का कोई छल नहीं था। उस दिन रंगों की आड़ में अनमोल के दिल की वो हिचक हमेशा के लिए खत्म हो गई जो वह वर्षों से छुपाए बैठा था। होली के उस जीवंत उत्सव ने दोनों की दुनिया को एक नए और रंगीन रिश्ते में पिरो दिया, जो सातों जन्मों तक रहने का वादा कर गया।

पुरानी हवेली की खिड़की

गाँव के छोर पर स्थित वह पुरानी हवेली सदियों पुरानी कहानियों की गवाह थी। कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं करता था, सिवाय अक्षित के, जो उस हवेली के जीर्णोद्धार का काम संभाल रहा था। एक दिन काम के दौरान उसे धूल से सनी एक पुरानी डायरी मिली, जिसके पन्नों पर अंजलि नाम की किसी लड़की के खूबसूरत खत लिखे थे। वे खत आज से पचास साल पुराने थे, जो किसी ऐसे शख्स के लिए थे जो कभी उन तक पहुँच ही नहीं पाया। अक्षित उन खतों के शब्दों में इस तरह खो गया कि उसे हवेली से ज्यादा उन भावनाओं की फिक्र होने लगी। तभी एक दिन एक वृद्ध महिला अपनी पोती नैना के साथ उस हवेली को देखने आईं। वह महिला कोई और नहीं बल्कि उसी अंजलि की बेटी थीं, जो अपनी माँ की आखिरी इच्छा पूरी करने आई थीं। नैना और अक्षित जब मिले, तो दोनों को लगा कि वे सदियों से एक-दूसरे को जानते हैं। अतीत के उन पन्नों ने वर्तमान में दो अजनबी दिलों को हमेशा के लिए एक अटूट बंधन में बांध दिया।

रिश्तों की डोर

खून के रिश्तों से बढ़कर नाम होता है, दोस्ती का अंदाज थोड़ा खास होता है। जमीन से लेकर आसमान तक ढूंढ लो यारो, ऐसा प्यारा बंधन कहां पास होता है।

जिगरी यार

खून का रिश्ता न सही पर रूह का नाता है, मेरा जिगरी यार मुझे सबसे ज्यादा भाता है। सारी दुनिया एक तरफ और मेरा यार एक तरफ, यह बंधन ताउम्र यूं ही निभाया जाता है।