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झींगा की लहरों पर लिखा नाम

झील के किनारे शाम के वक्त टहलना मेरा पुराना शौक था। उस शांत वातावरण में अक्सर मैं अपनी डायरी में कविताएं लिखा करती थी। एक शाम जब मैं अपने विचारों में खोई थी, तभी एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई और पास ही रेत पर किसी ने मेरा नाम लिख दिया। मैंने चौंककर पीछे देखा तो वहां अनिरुद्ध खड़ा था, जो पिछले कुछ दिनों से मुझे छुप-छुपकर पेंटिंग बनाते हुए देख रहा था। उसने अपने रंगों से न केवल मेरा नाम बल्कि मेरी पूरी दुनिया को खूबसूरत बना दिया। उसके बाद से झील की हर लहर हमारे प्रेम की साक्षी बन गई और हम दोनों ने एक साथ उम्र भर चलने का वादा कर लिया।

समुद्र की लहरें और सीपियों की खनक

समुद्र के शांत तट पर लहरें बार-बार आकर रेत पर लिखे नामों को मिटा रही थीं और रोहन चुपचाप बैठकर सीपियाँ बीन रहा था। तभी पास ही तान्या अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी और एक तेज़ हवा के झोंके से उसके कागज़ उड़कर रोहन के पास आ गए। जब रोहन ने कागज़ वापस किए तो उसने देखा कि उस पर समुद्र और प्रेम पर बहुत सुंदर कविताएँ लिखी थीं। दोनों की रुचि जब साहित्य और प्रकृति में मिली तो तट पर बिताया जाने वाला हर पल खास बन गया। लहरों के संगीत के बीच उन्होंने अपने दिल की बात एक दूसरे से कह दी और सीपियों में अपना भविष्य तलाशने लगे। अब वे दोनों हर शाम उसी तट पर मिलते हैं जहाँ लहरें उनके प्यार की दास्तां को हमेशा के लिए अमर कर देती हैं।

गुलाब की पंखुड़ियाँ

यूनिवर्सिटी के बोटैनिकल गार्डन में अध्ययन करते हुए रोहन और अनन्या अक्सर एक-दूसरे से टकरा जाते थे। रोहन को पेड़-पौधों और फूलों से बहुत लगाव था, जबकि अनन्या बॉटनी में रिसर्च कर रही थी। शुरुआत में उनकी बातें केवल पौधों की प्रजातियों और प्रोजेक्ट्स तक सीमित थीं, लेकिन धीरे-धीरे वे एक-दूसरे की पसंद और नापसंद जानने लगे। एक दिन अनन्या ने देखा कि उसके लैब की टेबल पर एक खास लाल गुलाब रखा है जिसके साथ एक छोटी सी पर्ची पर उसकी पसंदीदा कविता की पंक्तियाँ लिखी थीं। रोहन की इस खामोश मोहब्बत ने अनन्या के दिल में एक अलग ही हलचल पैदा कर दी। अगले दिन जब वे गार्डन में मिले, तो अनन्या ने बिना कुछ कहे रोहन को वही गुलाब वापस लौटाते हुए अपने दिल का हाल बयां कर दिया।

चाय और पुरानी डायरी

सर्दियों की एक शांत सुबह जब रिया अपने पुराने बक्से को साफ कर रही थी, तब उसे कॉलेज के दिनों की एक भूली-बिसरी डायरी मिली। पन्ने पलटने पर उसमें सूखे हुए गुलाब के फूल और राघव के हाथ की कुछ अनकही कविताएँ नजर आईं। कई साल पहले गलतफहमियों के कारण दोनों अलग हो गए थे और शहर छूट गए थे। उस डायरी ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया। रिया ने बिना सोचे-समझे राघव के पुराने नंबर पर एक संदेश भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ राघव की वही जानी-पहचानी आवाज गूंजी। उस एक फोन कॉल ने वर्षों की दूरी को पलभर में मिटा दिया और दोनों ने फिर से मिलने का फैसला किया।