🔍 सर्च इंजन

"मन" के लिए खोज परिणाम

हिंदी, हिंग्लिश या इंग्लिश में शायरी, ग़ज़लें, शायर या विषय खोजें

हाल की खोजें: मन
कुल 240 परिणाम मिले कीवर्ड: मन

वीरान सड़क का यात्री

कार से घर लौटते वक्त जंगल के रास्ते में मेरी गाड़ी अचानक खराब हो गई और फोन का नेटवर्क भी गायब हो गया। मैंने दूर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग को हाथ देते हुए देखा और मदद मांगने के लिए उनकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, मैंने देखा कि उनके पैर जमीन पर टिके नहीं थे बल्कि हवा में तैर रहे थे और उनका चेहरा सफेद पड़ चुका था। उन्होंने बिना अपना सिर घुमाए मुझसे पूछा कि क्या तुमने मेरी खोई हुई मंजिल देखी है। डर के मारे मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं भागकर अपनी कार में बैठ गया, लेकिन कार का इंजन लाख कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हुआ। वो भयानक आकृति धीरे-धीरे मेरी कार के शीशे के पास आने लगी और फिर सब कुछ अंधेरे में डूब गया।

पुराने कुएं का सच

गाँव के बाहर बने एक सुनसान खेत में एक पुराना कुआँ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें से रात को संगीत की आवाजें आती हैं। राहुल और उसके दोस्तों ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए रात के समय उस कुएं के पास जाने की योजना बनाई। जब वे वहां पहुंचे, तो वास्तव में कुएं के भीतर से घुंघरू की छनक और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था। राहुल ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी कुएं के अंदर डाली, पानी में तैरता हुआ एक चेहरा दिखाई दिया जो जोर-जोर से हंस रहा था। उसी पल राहुल के दोस्तों के पैर जमीन में धंस गए और कुएं से एक लंबा हाथ बाहर निकल आया।

रेत के टीले पर उगता विश्वास

एक समय की बात है, राजस्थान के एक सूखे और बंजर इलाके में सोहन नाम का एक किसान रहता था। वहाँ पानी की भारी कमी थी और चारों तरफ केवल रेत के ऊँचे टीले दिखाई देते थे। लोग मानते थे कि उस बंजर जमीन पर कुछ भी नहीं उगाया जा सकता। सभी किसानों ने हार मानकर उस जगह को छोड़ना शुरू कर दिया था। लेकिन सोहन के मन में कुछ अलग ही करने की जिद्द थी। उसने अपने बुजुर्गों से सुनी हुई कहानियों पर भरोसा किया कि जमीन के भीतर कहीं न कहीं मीठे पानी का स्रोत छिपा हुआ है। उसने बिना किसी की परवाह किए अपने बलबूते पर कुआं खोदना शुरू किया। दिन-रात उसकी मेहनत जारी रही, धूप की तपिश ने उसकी खाल झुलसा दी थी पर उसने काम नहीं रोका। महीने बीत गए और एक दिन अचानक उसके फावड़े से पानी की नमी टकराई। थोड़ी ही देर में वहाँ ठंडे और मीठे पानी का सोता फूट पड़ा। उस एक बूंद ने न केवल उस बंजर जमीन को हरा-भरा कर दिया, बल्कि आसपास के सभी लोगों को यह सिखा दिया कि अगर पक्का इरादा हो, तो सूखी रेत से भी पानी निकाला जा सकता है।

पुरानी बक्से में रखी डायरी

अमित को अपने दादाजी की अलमारी के कोने में एक बहुत पुरानी और धूल से भरी डायरी मिली। जब उसने उसे खोला, तो उसने पाया कि उसके दादाजी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में कितनी असफलताएँ झेली थीं। हर पन्ने पर असफलता के बाद किए गए नए प्रयोगों और कभी हार न मानने वाले संकल्प की एक लंबी दास्तान लिखी हुई थी। अमित खुद अपने जीवन में एक बड़े व्यापारिक घाटे के बाद पूरी तरह से टूट चुका था और घर बैठकर निराशा में अपना समय बिता रहा था। उसने जब उन पन्नों को ध्यान से पढ़ा, तो उसे महसूस हुआ कि उसके दादाजी ने उससे भी कहीं अधिक कठिन समय का सामना किया था। उस डायरी के शब्दों ने अमित के अंदर एक नई ऊर्जा और काम करने की एक अजीब सी ललक जगा दी। उसने अपनी पुरानी गलतियों से सबक लिया और नए सिरे से अपने काम की शुरुआत करने का पक्का निर्णय कर लिया। कुछ ही महीनों की कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बाद, उसका व्यापार फिर से चमक उठा और वह अपनी मंजिल पा गया।

बर्फ से ढकी चोटी और पर्वतारोही

हिमालय की बर्फीली वादियों में सोहन का सपना माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक अकेले पहुँचने का था। उसने कई बार असफलताओं का सामना किया था, लेकिन उसके भीतर का जोश कभी कम नहीं हुआ। एक दिन जब मौसम बहुत खराब हो गया और तेज बर्फीला तूफान चलने लगा, तो उसके सारे साथियों ने वापस लौटने का फैसला कर लिया। सोहन के सामने भी एक बड़ा संकट खड़ा हो गया कि वह आगे बढ़े या दूसरों के साथ लौट आए। उसने थोड़ी देर रुककर अपने दिल की आवाज सुनी और अपनी क्षमता पर पूरा विश्वास रखा। उसने अपने कदम फिर से आगे की तरफ बढ़ाए और धीरे-धीरे ही सही, लेकिन लगातार चलता रहा। कुछ घंटों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद, उसने आखिरकार उस लक्ष्य को हासिल कर लिया जिसका उसने सपना देखा था। इस अद्भुत सफलता ने उसे सिखाया कि रास्ते चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, यदि आपका इरादा पक्का है और हौसला बुलंद है, तो हर असंभव दिखने वाली मंजिल को आसानी से पाया जा सकता है।

पुरानी मीनार और चींटी का प्रयास

एक ऐतिहासिक गाँव में एक बहुत ऊंची पुरानी मीनार थी जिस पर चढ़ना नामुमकिन माना जाता था। एक दिन एक छोटे से बच्चे ने उस पर चढ़ने की जिद पकड़ ली। सभी गाँववालों ने उसे डराया कि यह बहुत खतरनाक है और बड़े-बड़े लोग भी इसमें असफल हो चुके हैं। लेकिन बच्चे ने किसी की बात नहीं सुनी और वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसे कई बार पिसलनों का सामना करना पड़ा और वह कई बार नीचे गिर गया। हर बार गिरने के बाद वह अपने घुटनों को झाड़ता और फिर से पूरी ताकत से आगे बढ़ जाता। अंत में उसने अपनी छोटी और नन्हीं कोशिशों से मीनार की चोटी पर झंडा फहरा ही दिया। तब उसने सबको सिखाया कि बड़ी से बड़ी चुनौती को भी लगातार छोटे प्रयासों से जीता जा सकता है।

रेलवे स्टेशन की बेंच और एक नई शुरुआत

शहर के व्यस्त रेलवे स्टेशन की एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सोहन बैठा था। उसके हाथ में असफलता का एक लंबा इतिहास और भविष्य को लेकर भारी अनिश्चितता थी। उसने अपने सारे सपने इसी शहर में आकर खो दिए थे और अब वह वापस अपने गाँव लौटने की सोच रहा था। तभी उसके पास एक वृद्ध व्यक्ति आकर बैठे और उन्होंने सोहन के कंधे पर हाथ रखा। वृद्ध ने अपनी जेब से एक छोटी सी डायरी निकाली और कहा कि सूरज हर शाम ढलता है ताकि अगली सुबह और अधिक ऊर्जा के साथ उग सके। असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। सोहन के मन में अचानक एक नई उम्मीद की किरण जगी। उसने अपनी वापसी का टिकट फाड़ दिया और एक बार फिर से अपनी मेहनत की शुरुआत करने का दृढ़ संकल्प ले लिया।

अनंत आकाश और नन्हा पक्षी

घने जंगल के एक ऊंचे पेड़ पर चीकू नाम का नन्हा पक्षी रहता था। उसे उड़ने से बहुत डर लगता था क्योंकि उसने कभी ऊंचे आसमान को पार नहीं किया था। उसके बाकी साथी रोज बादलों के पार उड़ान भरते, और वह नीचे बैठकर उन्हें देखता रहता था। एक दिन जंगल में अचानक आग लग गई और उसका पेड़ खतरे में आ गया। जान बचाने के लिए चीकू के पास उड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसने अपने पंख फैलाए और डर को पीछे छोड़कर आसमान में छलांग लगा दी। उस दिन उसे समझ आया कि डर सिर्फ मन का वहम है, और पंखों में आसमान को नापने की ताकत हमेशा से छिपी होती है।

रेगिस्तान का शांत ओएसिस

दूर रेगिस्तान की तपती रेत के बीच एक अकेला यात्री भयंकर प्यास से जूझ रहा था। उसकी आँखों के सामने केवल अंतहीन रेत और धूप का समंदर था, जहाँ कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। उसने हार मानकर जमीन पर बैठने का फैसला किया, तभी उसे हवा में नमी का अहसास हुआ। अपनी आखिरी ताकत जुटाकर वह कुछ कदम आगे बढ़ा और एक छोटे से टीले को पार किया। वहाँ एक छुपा हुआ जलस्रोत था जिसके चारों ओर हरी-भري घास और कुछ छोटे पौधे उग रहे थे। उस ठंडे पानी को पीकर उसकी जान में जान आ गई और उसने समझा कि जीवन में बड़ी सफलता अक्सर हमारे सबसे बड़े संघर्ष के ठीक बाद मिलती है।

पेड़ के सूखे पत्ते और नई कोपलें

एक पुराने बरगद के पेड़ पर जब पतझड़ आया, तो उसके सारे पुराने पत्ते पीले पड़कर ज़मीन पर बिखर गए। पेड़ एकदम सूना और बेजान सा दिखने लगा। आसपास के छोटे पौधे उस पर हंसने लगे कि अब इस पेड़ का अंत नजदीक है और यह कभी हरा-भरा नहीं हो पाएगा। लेकिन उस पुराने पेड़ को अपने जड़ों की ताकत पर पूरा भरोसा था। उसने चुपचाप उस कठिन मौसम को सहन किया और अंदर ही अंदर अपनी ऊर्जा को संचित करता रहा। जब वसंत ऋतु आई, तो उसी ठूंठ जैसे तने से नई, हरी-भरी और कोमल कोपलें फूट पड़ीं। कुछ ही दिनों में वह पेड़ फिर से अपने पूरे वैभव के साथ खड़ा हो गया। जीवन का पतझड़ भी ऐसा ही होता है, जो पुरानी कमियों को गिराकर नई शुरुआत का अवसर देता है।

संगमरमर की अनूठी मूर्ति

एक बार एक मूर्तिकार एक बड़े संगमरमर के पत्थर को तराशकर एक भव्य मूर्ति बनाने में जुटा हुआ था। वह कई हफ्तों तक हथौड़े और छेनी से उस पर लगातार प्रहार करता रहा। पत्थर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया और वह दर्द से मानो कराह उठा। उसने मूर्तिकार से कहा कि यह प्रहार अब सहन नहीं होते, मुझे छोड़ दो। मूर्तिकार ने मुस्कुराते हुए कहा कि यदि आज इन कष्टों से डर गए, तो तुम्हारी यह साधारण बनावट हमेशा ऐसी ही रह जाएगी। लेकिन अगर तुमने इन आघातों को झेल लिया, तो कल पूरी दुनिया तुम्हारे आगे नतमस्तक होगी। कुछ दिनों की कड़ी मेहनत के बाद वही पत्थर एक सुंदर देव प्रतिमा में बदल गया, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। जीवन में भी जब मुश्किलें हमें तोड़ना चाहें, तब समझ लेना चाहिए कि ईश्वर हमें एक महान कृति बना रहा है।

पहाड़ की चोटी और चील

हिमालय की बर्फीली वादियों में एक चील का बच्चा रहता था, जो दूसरे पक्षियों की देखा-देखी खुद को बहुत कमजोर समझता था। उसे लगता था कि वह कभी भी उस ऊंचे पहाड़ की चोटी तक नहीं उड़ पाएगा क्योंकि उसके पंख बहुत छोटे हैं। एक दिन घाटी में भयंकर तूफान आया, जिससे सभी छोटे पक्षी डरकर अपनी गुफाओं में छिप गए। चील के बच्चे को अपनी जान बचाने के लिए उड़ना ही पड़ा क्योंकि उसका घोंसला खतरे में था। जैसे ही उसने हवा का सामना करते हुए अपने पंख पसारे, उसे महसूस हुआ कि हवा उसे नीचे धकेलने के बजाय आसमान की तरफ उठा रही है। वह उड़ता गया और आखिरकार उसी पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर जा पहुंचा, जहां से पूरी दुनिया बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी। उसका सारा डर एक ही पल में गायब हो गया और उसने अपनी असली ताकत को पहचान लिया।