रेत के टीले पर उगता विश्वास

रेत के टीले पर उगता विश्वास

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एक समय की बात है, राजस्थान के एक सूखे और बंजर इलाके में सोहन नाम का एक किसान रहता था। वहाँ पानी की भारी कमी थी और चारों तरफ केवल रेत के ऊँचे टीले दिखाई देते थे। लोग मानते थे कि उस बंजर जमीन पर कुछ भी नहीं उगाया जा सकता। सभी किसानों ने हार मानकर उस जगह को छोड़ना शुरू कर दिया था। लेकिन सोहन के मन में कुछ अलग ही करने की जिद्द थी। उसने अपने बुजुर्गों से सुनी हुई कहानियों पर भरोसा किया कि जमीन के भीतर कहीं न कहीं मीठे पानी का स्रोत छिपा हुआ है। उसने बिना किसी की परवाह किए अपने बलबूते पर कुआं खोदना शुरू किया। दिन-रात उसकी मेहनत जारी रही, धूप की तपिश ने उसकी खाल झुलसा दी थी पर उसने काम नहीं रोका। महीने बीत गए और एक दिन अचानक उसके फावड़े से पानी की नमी टकराई। थोड़ी ही देर में वहाँ ठंडे और मीठे पानी का सोता फूट पड़ा। उस एक बूंद ने न केवल उस बंजर जमीन को हरा-भरा कर दिया, बल्कि आसपास के सभी लोगों को यह सिखा दिया कि अगर पक्का इरादा हो, तो सूखी रेत से भी पानी निकाला जा सकता है।
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