बूढ़े माली का धैर्य
एक छोटे से गाँव में सोहन नाम का एक बूढ़ा माली रहता था। वह हर रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले अपने बगीचे में पहुँच जाता और पौधों की देखरेख करता था। गाँव के युवा उससे अक्सर कहते थे कि वह इतने छोटे फूलों के पौधों पर इतनी मेहनत क्यों करता है, जिसका फल तुरंत नहीं मिलता। सोहन मुस्कुराकर कहता था कि धैर्य और निरंतरता ही हर चीज़ का असली आधार है। एक दिन अचानक भीषण सूखा पड़ा, जिससे आस-पास के सभी बड़े बाग सूख गए। लेकिन सोहन के बगीचे की गहरी और मजबूत जड़ें वाले पौधे न केवल जीवित रहे, बल्कि उन्होंने पूरे गाँव को सुंदर फूलों से महका दिया। युवाओं को समझ आ गया कि बिना धैर्य के कोई भी बड़ी सफलता हासिल नहीं की जा सकती।
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