#नैतिक कहानी
हिन्दी
कछुए की अटूट निष्ठा
“
एक शांत झील के किनारे एक बूढ़ा कछुआ रहता था जो अपनी धीमी गति के कारण हमेशा दूसरों की हंसी का पात्र बनता था। जंगल के जानवर उसकी चाल का मजाक उड़ाते थे, लेकिन कछुआ कभी निराश नहीं होता था। एक दिन जंगल में भयानक आग लग गई और सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कछुए ने अपनी धीमी गति के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपनी पीठ पर छोटे जीवों को लादकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाना शुरू किया। उसने लगातार कई फेरे लगाए और कई बेकसूर जानों की रक्षा की। संकट टलने के बाद सभी जानवरों को समझ आ गया कि सफलता गति से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और सेवा भाव से मिलती है।
👁️ 1 बार पढ़ा गया
❤️ लोगों ने पसंद किया
टिप्पणियाँ
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।