शाम की ठंडी हवा और चाय की प्याली
दफ्तर से लौटते वक्त उस छोटी सी चाय की दुकान पर रुकना मेरा नियम बन गया था। वहाँ मिलने वाली कुल्हड़ की चाय से ज्यादा तुम्हारी मौजूदगी मुझे खींचती थी। हम दोनों अक्सर बिना कुछ कहे घंटों बैठे रहते थे, बस चाय की चुस्कियाँ और आसमान का रंग बदलते देखते थे। एक शाम तुमने बिना पूछे मेरी प्याली में थोड़ी सी चीनी और मिला दी, और तब मैंने समझ लिया कि मेरी जिंदगी का मीठापन अब तुम्हारे ही नाम है।
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