🔍 सर्च इंजन

"वक्त" के लिए खोज परिणाम

हिंदी, हिंग्लिश या इंग्लिश में शायरी, ग़ज़लें, शायर या विषय खोजें

हाल की खोजें: वक्त
कुल 143 परिणाम मिले कीवर्ड: वक्त

शाम की ठंडी हवा और चाय की प्याली

दफ्तर से लौटते वक्त उस छोटी सी चाय की दुकान पर रुकना मेरा नियम बन गया था। वहाँ मिलने वाली कुल्हड़ की चाय से ज्यादा तुम्हारी मौजूदगी मुझे खींचती थी। हम दोनों अक्सर बिना कुछ कहे घंटों बैठे रहते थे, बस चाय की चुस्कियाँ और आसमान का रंग बदलते देखते थे। एक शाम तुमने बिना पूछे मेरी प्याली में थोड़ी सी चीनी और मिला दी, और तब मैंने समझ लिया कि मेरी जिंदगी का मीठापन अब तुम्हारे ही नाम है।

पुरानी घड़ी की टिक-टिक

दादी की विरासत में मिली वह बड़ी सी दीवार घड़ी अब टिक-टिक करना बंद कर चुकी थी। विक्रम उसे ठीक कराने के लिए शहर के सबसे पुराने घड़ीसाज के पास पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात नैना से हुई, जो अपनी पुश्तैनी घड़ियों को ठीक करवाने आई थी। दोनों घंटों उस दुकान में पुरानी घड़ियों की आवाज़ सुनते रहे और वक्त के पहिये के साथ उनकी बातें भी आगे बढ़ने लगीं। घड़ीसाज ने जब कहा कि वक्त को वापस नहीं लाया जा सकता, तो विक्रम ने नैना की आँखों में देखते हुए कहा कि कुछ लम्हें ऐसे होते हैं जो घड़ी की सुइयों को रोक देते हैं। उस दुकान की खामोशी में एक नया संगीत गूंज उठा था, जो ताउम्र उनके साथ रहने वाला था।

शाम की चौखट

सूरज ढल रहा था और पुरानी हवेली के सामने वाली चाय की दुकान पर लोगों की भीड़ कम हो रही थी। कबीर हर शाम अपनी साइकिल वहीं रोकता था क्योंकि उसे पता था कि उस वक्त शिखा अपनी बालकनी से पौधे को पानी देने जरूर आएगी। दोनों के बीच सिर्फ नजरों का संवाद होता था, जो शब्दों से कहीं ज्यादा बयां कर देता था। एक दिन हवा इतनी तेज चली कि शिखा के हाथ से गमला छूटकर नीचे गिरने ही वाला था कि कबीर ने फुर्ती से आगे बढ़कर उसे थाम लिया। उस मामूली सी घटना ने दोनों के बीच के सारे संकोच को तोड़ दिया और पहली बार उनके बीच सीधी बातचीत हुई। ढलते सूरज की रोशनी में दोनों ने महसूस किया कि उनका यह मौन प्यार अब एक मुखर हकीकत बन चुका था।

घड़ी की टिक-टिक

रेलवे स्टेशन का वह प्लेटफार्म हमेशा की तरह भीड़भाड़ से भरा हुआ था। आलोक की ट्रेन छूटने में बस कुछ ही मिनट बाकी थे और स्नेहा अपनी भावनाओं को आंसुओं में छिपाने की कोशिश कर रही थी। दोनों ने कभी अपने दिल की बात एक-दूसरे को नहीं बताई थी, और आज विदाई का वक्त आ चुका था। ट्रेन ने सीटी बजाई और पहिए धीरे-धीरे घूमने लगे। तभी आलोक ने खिड़की से झुककर अपना हाथ बढ़ाया और स्नेहा के हाथ में एक छोटी सी घड़ी रख दी जिस पर लिखा था कि वक्त कभी भी हमें अलग नहीं कर सकता। स्नेहा मुस्कुराई और समझ गई कि शब्दों के बिना भी प्यार का इजहार मुमकिन है।

रात के सपने

रात को सोते वक्त लगता है कि कल सुबह उठकर दुनिया बदल देंगे, लेकिन सुबह अलार्म बजते ही लगता है कि दुनिया जैसी है वैसी ही ठीक है।

पुराने गाने

बचपन में लगता था कि हमारे घर के बड़े लोग कितने बोरिंग गाने सुनते हैं, और आज खुद उन गानों पर रील बनाते वक्त आँखें नम हो जाती हैं।

सुबह की दौड़

कल से सुबह पाँच बजे उठकर दौड़ लगाऊंगा, यह बात मैंने रात को सोते वक्त खुद से कही थी और सुबह गहरी नींद में खुद को ही जवाब दिया कि सेहत से ज्यादा जरूरी नींद है।

घर की सफाई

दीवाली पर घर की सफाई करते समय ऐसी-ऐसी चीजें मिलती हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि हम किसी दूसरे ग्रह के म्यूजियम में घूम रहे हैं।