सुबह की दौड़

सुबह की दौड़

“
कल से सुबह पाँच बजे उठकर दौड़ लगाऊंगा, यह बात मैंने रात को सोते वक्त खुद से कही थी और सुबह गहरी नींद में खुद को ही जवाब दिया कि सेहत से ज्यादा जरूरी नींद है।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)