#प्रेम कहानी
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पुरानी घड़ी की टिक-टिक
“
दादी की विरासत में मिली वह बड़ी सी दीवार घड़ी अब टिक-टिक करना बंद कर चुकी थी। विक्रम उसे ठीक कराने के लिए शहर के सबसे पुराने घड़ीसाज के पास पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात नैना से हुई, जो अपनी पुश्तैनी घड़ियों को ठीक करवाने आई थी। दोनों घंटों उस दुकान में पुरानी घड़ियों की आवाज़ सुनते रहे और वक्त के पहिये के साथ उनकी बातें भी आगे बढ़ने लगीं। घड़ीसाज ने जब कहा कि वक्त को वापस नहीं लाया जा सकता, तो विक्रम ने नैना की आँखों में देखते हुए कहा कि कुछ लम्हें ऐसे होते हैं जो घड़ी की सुइयों को रोक देते हैं। उस दुकान की खामोशी में एक नया संगीत गूंज उठा था, जो ताउम्र उनके साथ रहने वाला था।
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