बंद बक्से का राज़
अमित को उसके दादाजी की अटारी से एक लोहे का पुराना बक्सा मिला था। बक्से पर कई ताले लगे थे और उस पर चेतावनी खुदी थी कि इसे कभी न खोला जाए। जिज्ञासा के वश में आकर अमित ने एक रात लोहे की रॉड से बक्से का मुख्य ताला तोड़ दिया। जैसे ही ढक्कन उठा, उसमें से एक ठंडी और सड़ी हुई हवा का झोंका निकला, जिसके साथ बच्चों के रोने की बहुत ही धीमी आवाज़ें आ रही थीं। बक्से के अंदर कोई खजाना नहीं था, बल्कि एक पुरानी तस्वीर थी जिस पर अमित का ही चेहरा बना हुआ था, और उसकी आँखें धीरे-धीरे खून से लाल हो रही थीं।
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