खुशियों का पहरा
जब भी उदास बैठा मैं किसी कोने में, तूने आकर हंसी के दीये जला दिए। मेरे गम को अपना बनाकर ए मेरे यार, मेरी तकदीर के पन्ने सजा दिए।
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