#दर्द शायरी
हिन्दी
खामोश निगाहें
“
कहने को बहुत कुछ था पर जुबां साथ न दी,
हमारी खामोशी ही हमारी सबसे बड़ी फरीद थी।
हमारी खामोशी ही हमारी सबसे बड़ी फरीद थी।
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