मंजिल की तलाश
रास्ते खुद ब खुद बनते गए सफर में,
हम चले थे अकेले ही इस नगर में।
हम चले थे अकेले ही इस नगर में।
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रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर छोटी टिप्पणियाँ।