वक़्त के साए

वक़्त के साए

“
वक़्त की चाल को कौन भला पहचान पाया है, यहाँ हर शख्स ने बस सबक ही नया पाया है। जो आज पास है कल शायद नजर न आए, इसी का नाम तो शायद असल में माया है।
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