आईने का दूसरा किनारा
नताशा ने अपने नए किराए के घर के हॉल में एक बहुत बड़ा प्राचीन आईना लगाया था। वह रोज़ रात को सोने से पहले अपने बाल उस आईने के सामने सँवारती थी। एक रात जब वह बाल झाड़ रही थी, तो उसने गौर किया कि आईने में उसका अक्स उसकी नकल नहीं कर रहा था। बल्कि उसका अक्स उसकी तरफ देखकर एक भयानक मुस्कान बिखेर रहा था। नताशा डर के मारे पीछे हटी, लेकिन आईने के अंदर से एक हाथ बाहर आया और उसने उसका गला कसकर पकड़ लिया। अगली सुबह जब मकान मालिक आया, तो नताशा का शरीर गायब था और आईने पर खून से उसका नाम लिखा हुआ था।
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