पेड़ का उपकार और इंसान
गांव के चौराहे पर एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ था जो राहगीरों को अपनी ठंडी छाया देता था। एक स्वार्थी व्यापारी ने उस पेड़ को कटवाकर वहां एक पक्की दुकान बनाने की सोची ताकि वह और अधिक मुनाफा कमा सके। गांव के बच्चों ने जब यह सुना तो वे पेड़ से लिपट गए और उसे बचाने की गुहार लगाने लगे। व्यापारी पर बच्चों के प्रेम और पेड़ के उपकारों का ऐसा असर हुआ कि उसका दिल पिघल गया। उसने न केवल पेड़ को काटने का विचार छोड़ दिया, बल्कि उसके चारों ओर एक सुंदर चबूतरा भी बनवा दिया। इस घटना ने सबको सिखाया कि प्रकृति हमारी रक्षक है और हमें भी उसकी रक्षा करनी चाहिए।
1