सूखे तालाब की सुनहरी उम्मीद
गाँव के बाहर एक पुराना और विशाल तालाब था जो कई वर्षों की भयंकर सूखे के कारण पूरी तरह से सूख चुका था। गाँव के सभी लोगों ने उस तालाब की ओर देखना तक छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें लगता था कि अब वहाँ कभी पानी नहीं आ सकता। लेकिन गाँव का एक बूढ़ा किसान प्रतिदिन सुबह उठकर उस सूखे तालाब के बीच में जाता और थोड़ी सी मिट्टी खोदकर बाहर फेंकता था। बाकी लोग उसकी इस अजीब हरकत पर हंसते और उसे पागल कहते, लेकिन किसान चुपचाप अपने काम में लगातार जुटा रहता था। एक दिन जब आसमान काले बादलों से घिर गया और मूसलाधार बारिश हुई, तो किसान की उस निरंतर मेहनत का कमाल दिखाई दिया। सूखे तालाब की गहराई बढ़ चुकी थी जिसके कारण इस बार गाँव का सारा बरसाती पानी उसी तालाब में आकर एकत्र हो गया। देखते ही देखते वह सूखा तालाब फिर से लबालब भर गया और पूरे इलाके में हरियाली छा गई। इस घटना ने सबको सिखाया कि निरंतर प्रयास और धैर्य से किसी भी बदतर स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।
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