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कुल 296 परिणाम मिले खोज शब्द: कहानी

सपनों का खौफनाक सफर

अमित को पिछले कुछ दिनों से एक ही सपना बार-बार आ रहा था, जिसमें एक सुनसान सड़क पर कोई उसका पीछा कर रहा था। शुरुआत में उसने इसे महज एक आम सपना समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन एक रात उसने सपने में खुद को उस सड़क पर सचमुच दौड़ते हुए पाया। जब उसकी नींद खुली, तो उसके पैरों में असली धूल और मिट्टी जमी हुई थी। अगली रात, उसने तय किया कि वह सपने के अंत तक जाएगा और उस पीछा करने वाले का चेहरा देखेगा। जैसे ही वह मुड़ा, उसने पाया कि वह भयानक साया कोई और नहीं बल्कि उसका अपना ही अतीत था।
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नीली रोशनी का साया

रोहन ने जब अपने नए कमरे में प्रवेश किया, तो उसे दीवारों पर अजीब से नीले धब्बे दिखाई दिए। उसे लगा कि शायद यह सीलन का असर होगा, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात के ठीक बारह बजे, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया और एक अजीब सी फुसफुसाहट सुनाई देने लगी। रोहन ने उठकर देखा तो कोने में रखी पुरानी अलमारी अपने आप खुल रही थी। अलमारी के भीतर से कोई अदृश्य ताकत बाहर आई और उसके ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। उसने डरकर आंखें बंद कर लीं और जब सुबह हुई, तो वह कमरा पूरी तरह बदल चुका था।
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आधी रात का संगीत

अमित एक संगीतकार था जो अपने नए एल्बम की रचना के लिए एक शांत पहाड़ी बंगले में रहने गया था। हर रात ठीक बारह बजे, उसके कमरे में रखे बंद पियानो से खुद-ब-खुद एक उदास धुन बजने लगती थी। शुरू में उसे लगा कि यह हवा का असर होगा, लेकिन एक रात उसने पियानो के पास जाकर देखा कि अदृश्य उंगलियां उन चाबियों पर थिरक रही थीं। जैसे ही उसने पियानो को छूना चाहा, कमरे के सारे शीशे एक साथ चकनाचूर हो गए और हवा में एक अजीब सी आवाज गूंजी कि यह संगीत अब कभी खत्म नहीं होगा।
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काले पानी का रहस्य

शहर के एक पुराने और गहरे कुएं के पास जाने से हर कोई डरता था। लोक कथाओं के अनुसार, उस कुएं का पानी किसी की प्यास नहीं बुझाता बल्कि उसकी आत्मा खींच लेता है। तरुण एक विज्ञान का छात्र था और इन अंधविश्वासों को नहीं मानता था। एक पूर्णिमा की रात, वह उस कुएं के पास गया और उसका पानी झांककर देखने लगा। पानी बिल्कुल शांत था, लेकिन अचानक उसमें से एक काले धुएं का हाथ निकला और तरुण की कलाई को पकड़ लिया। तरुण ने जब खुद को छुड़ाने की कोशिश की, तो कुएं के भीतर से सैकड़ों डरावनी आवाजें आने लगीं जो उसका नाम पुकार रही थीं।
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सर्दियों की रात का साया

कड़ाके की ठंड में राहुल अपने गांव लौट रहा था। कोहरा इतना घना था कि सामने का रास्ता बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था। तभी सड़क के किनारे उसे एक बुजुर्ग महिला दिखाई दी जो ठंड से कांप रही थी। राहुल ने अपनी कार रोकी और उसे अंदर बिठा लिया। कुछ दूर चलने के बाद जब उसने महिला से पूछा कि वह कहां जाएगी, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा, तो महिला की जगह कार की पिछली सीट पर केवल बर्फ की एक ठंडी परत और सूखी हड्डियां पड़ी थीं। एक भयानक चीख के साथ कार का पहिया अपने आप थम गया।
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रेगिस्तान की सुनसान हवेली

राजस्थान के एक वीरान इलाके में बने पुराने किलेनुमा मकान में सोहन ने एक रात बिताने का फैसला किया। चारों तरफ सिर्फ रेत और खामोश रात का अंधेरा था। जब रात के दो बजे, तो अचानक भारी दरवाजों के अपने आप खुलने और बंद होने की आवाजें आने लगीं। सोहन ने टॉर्च जलाकर देखा, तो दीवार पर लटकी पुरानी पेंटिंग में बने राजा की आंखें जीवित हो उठी थीं और वह उसे घूर रहा था। कमरे का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिर गया और पैरों तले रेत खिसकने लगी। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा, लेकिन पीछे से गूंजती हंसी आज भी उसके कानों में गूंजती है।
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पुरानी घड़ी की सुई

अजय को एंटीक घड़ियाँ जमा करने का शौक था। उसने शहर की एक पुरानी दुकान से एक ऐसी दीवार घड़ी खरीदी जिसकी सुइयां हमेशा उल्टी दिशा में घूमती थीं। रात के ठीक तीन बजे उस घड़ी से टिक-टिक की आवाज के साथ तेज सायरन जैसी आवाज आने लगी। अजय ने जब उसे उतारने की कोशिश की, तो दीवार पर एक परछाई उभर कर सामने आई जो बिल्कुल उसकी अपनी नकल थी लेकिन उसकी आँखें लाल थीं। परछाई ने दीवार से बाहर निकलकर अजय का गला पकड़ लिया और अगले दिन वह घड़ी फिर से अपनी सामान्य रफ्तार से चलने लगी।
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अधूरा मिट्टी का खिलौना

कुम्हार मदन लाल अपनी मिट्टी की दुकान में अकेले बैठकर चाक चला रहा था। उसने रात में एक अजीब सी आकृति को मिट्टी से खुद-ब-खुद आकार लेते देखा। उसे लगा कि शायद यह उसका भ्रम है, इसलिए उसने नजरअंदाज कर दिया और दुकान बंद करने लगा। तभी एक छोटे बच्चे की रोने की आवाज गूंजी और टेबल पर रखा वो अधूरा मिट्टी का खिलौना अपने आप चलने लगा। मदन ने डरते हुए उस खिलौने के पास जाकर देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए, क्योंकि वह खिलौना बिल्कुल उसके अपने बचपन के उस खिलौने जैसा था जो तीस साल पहले खो गया था।
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बरगद के नीचे का झूला

गाँव के पुराने बरगद के पेड़ पर बंधा हुआ लोहे का झूला हवा के बिना भी अक्सर जोर-जोर से हिला करता था। बुजुर्ग लोग चेतावनी देते थे कि उस तरफ शाम के बाद भूलकर भी नहीं जाना चाहिए। एक दिन जिज्ञासावश तरुण ने उस झूले के पास जाकर खड़े होने की हिम्मत जुटाई। जैसे ही उसने झूले को छूने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, किसी अदृश्य ताकत ने उसके कंधे पर भारी दबाव महसूस कराया और कानों में एक अजीब सी फुसफुसाहट गूंजी। तरुण डर के मारे पीछे हटा और उसने देखा कि खाली झूले पर किसी के बैठने के निशान बन रहे थे और मिट्टी पर पैरों के निशान तेजी से उसकी तरफ बढ़ रहे थे।
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पीले कागजों का बंडल

गांव के बाहरी हिस्से में स्थित पुराने डाकघर की सफाई करते समय रमित को पीले पड़ चुके कागजों का एक पुराना बंडल मिला। जब उसने उन पत्रों को पढ़ना शुरू किया, तो पाया कि वे सभी उसी पते पर लिखे गए थे जहाँ वह खुद रहता है और भेजने वाले का नाम भी वही था जो उसका अपना था। पत्रों पर दर्ज तारीखें आने वाले कल की थीं। हैरान होकर उसने रात के ठीक बारह बजे अपने नाम से आए उस नए लिफाफे को खोला, जिसके अंदर एक पन्ना था जिस पर लिखा था कि अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है। तभी डाकघर के दरवाजे पर जोर से दस्तक गूंजी और ठंडी हवा का एक झोंका उसकी रीढ़ में सिहरन पैदा कर गया।
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पुरानी मीनार की ऊपरी मंजिल

शहर के बीचों-बीच बनी वह ऐतिहासिक मीनार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, लेकिन उसकी सबसे ऊपरी मंजिल पर जाने की सख्त मनाही थी। इतिहास के छात्र राहुल को इस प्रतिबंध के पीछे का राज़ जानना था। वह चुपचाप रात के समय मीनार के अंदर घुस गया और सीढ़ियां चढ़ने लगा। ऊपर पहुंचते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे हवा का तापमान बहुत कम हो गया हो। उसने अपनी टॉर्च जलाई और सामने देखा कि एक परछाई दीवार पर लिख रही थी। जब उसने पास जाकर देखा, तो वह शब्द उसकी अपनी ही मौत की तारीख थी। तभी पीछे से दरवाजे के भारी ताले के बंद होने की आवाज गूंजी और मीनार की घड़ी ने रात के ठीक बारह बजा दिए।
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घने जंगल की छुपी हुई कुटिया

शहर से दूर एक घने जंगल में ट्रेकिंग करते हुए रोहन रास्ता भटक गया। चारों तरफ घना अंधेरा छा चुका था और जंगली जानवरों की आवाजें डराने लगी थीं। तभी उसे दूर एक छोटी सी कुटिया में हल्की सी लालटेन जलती हुई दिखाई दी। उसने राहत की सांस ली और मदद मांगने के लिए उस कुटिया की तरफ बढ़ गया। दरवाजा खुला हुआ था और अंदर एक बूढ़ी औरत चूल्हे के पास बैठी थी। रोहन ने जब उससे पानी मांगा, तो औरत ने बिना चेहरा घुमाए बर्तन उसकी तरफ बढ़ा दिया। जब रोहन ने पानी पीने के लिए बर्तन उठाया, तो उसके होश उड़ गए क्योंकि उसमें पानी की जगह खून भरा था। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर कोई अदृश्य दीवार थी।
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