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दूसरी मंजिल की खाली खिड़की

रोहित अपने परिवार के साथ एक नए किराए के मकान में रहने आया था। मकान का किराया बहुत कम था क्योंकि उसके बारे में मोहल्ले में कई तरह की बातें मशहूर थीं। घर की दूसरी मंजिल पर एक खिड़की थी जिस पर हमेशा काले रंग का पर्दा पड़ा रहता था। रोहित के लाख मना करने के बावजूद उसके छोटे बेटे ने एक दिन जिज्ञासावश वह पर्दा हटा दिया। उस पल के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रात को उस खिड़की के शीशे पर बाहर से किसी के नाखून खुरचने की आवाजें आने लगीं और घर के सभी नल अपने आप खुलने लगे। जब उन्होंने मकान मालिक से पूछा, तो पता चला कि उस खिड़की के सामने खड़े होकर किसी ने आत्महत्या की थी और उसकी रूह आज भी वहीं भटकती है।

अक्सर बंद रहने वाले गोदाम का खौफ

शहर के पुराने बाजार में एक ऐसा गोदाम था जो पिछले तीस साल से हमेशा बंद रहता था। व्यापारी राघव ने सस्ते दाम मिलने पर उसे खरीद लिया और सफाई का काम शुरू किया। जैसे ही मजदूरों ने उसका भारी लोहे का दरवाजा खोला, अंदर से सड़े हुए फूलों और पुरानी धूल की तेज गंध बाहर आई। उस रात जब राघव गोदाम के कागजात देखने रुका, तो उसे कोनों से किसी के घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी। उसने हिम्मत करके टार्च की रोशनी डाली, तो हवा में तैरती हुई एक धुंधली सी आकृति नजर आई जो तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगी। डर के मारे राघव बेहोश हो गया और सुबह जब उसे होश आया, तो गोदाम का दरवाजा अंदर से बंद था और बाहर उसकी खुद की चीखने की आवाज गूंज रही थी।

रसोई से आती अजीब आवाजें

नयी नौकरी मिलने के बाद शहर के एक सुनसान इलाके में सोहन ने किराए पर एक मकान लिया। मकान बहुत सस्ता था क्योंकि उसके पिछले मालिक के साथ कुछ अनहोनी हुई थी। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर रात कोसोईघर से बर्तन गिरने की आवाजें आने लगीं। सोहन जब भी देखने जाता, वहां सब कुछ अपनी जगह पर व्यवस्थित मिलता और कोई नहीं होता। एक रात आवाजें बहुत तेज हो गईं और प्लेटें हवा में उड़ने लगीं। सोहन ने हिम्मत करके रसोई का दरवाजा खोला तो देखा कि एक धुंधली परछाई हवा में तैर रही थी। परछाई ने धीरे से मुड़कर सोहन की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर कोई आंखें नहीं थीं। उस भयानक दृश्य को देखकर सोहन बेहोश हो गया और होश आने पर उसने उसी रात वह घर हमेशा के लिए छोड़ दिया।

आईने का दूसरा किनारा

नताशा ने अपने नए किराए के घर के हॉल में एक बहुत बड़ा प्राचीन आईना लगाया था। वह रोज़ रात को सोने से पहले अपने बाल उस आईने के सामने सँवारती थी। एक रात जब वह बाल झाड़ रही थी, तो उसने गौर किया कि आईने में उसका अक्स उसकी नकल नहीं कर रहा था। बल्कि उसका अक्स उसकी तरफ देखकर एक भयानक मुस्कान बिखेर रहा था। नताशा डर के मारे पीछे हटी, लेकिन आईने के अंदर से एक हाथ बाहर आया और उसने उसका गला कसकर पकड़ लिया। अगली सुबह जब मकान मालिक आया, तो नताशा का शरीर गायब था और आईने पर खून से उसका नाम लिखा हुआ था।

पहाड़ी बंगले का साया

छुट्टियां बिताने के लिए मैंने पहाड़ों पर एक पुराना और अकेला बंगला किराए पर लिया था, जिसके बारे में गांव वाले बात करने से भी कतराते थे। पहली रात ही मुझे छत पर किसी के भारी जूतों के चलने की आवाज सुनाई दी, जो पूरे घर में गूंज रही थी। जब मैं टॉर्च लेकर ऊपर गया तो वहां कोई नहीं था, सिवाय एक खुली हुई पुरानी डायरी के जिसके पन्ने तेज हवा से खुद-ब-खुद पलट रहे थे। डायरी का आखिरी पन्ना खाली था जिस पर मेरे ही हाथों से लिखा हुआ एक संदेश उभर आया कि कल तुम्हारी बारी है। यह देखकर मेरे हाथ से टॉर्च छूटकर गिर गई और चारों तरफ घना अंधेरा छा गया, साथ ही किसी के हंसने की भारी आवाज चारों तरफ गूंजने लगी।

वीरान सड़क का यात्री

कार से घर लौटते वक्त जंगल के रास्ते में मेरी गाड़ी अचानक खराब हो गई और फोन का नेटवर्क भी गायब हो गया। मैंने दूर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग को हाथ देते हुए देखा और मदद मांगने के लिए उनकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, मैंने देखा कि उनके पैर जमीन पर टिके नहीं थे बल्कि हवा में तैर रहे थे और उनका चेहरा सफेद पड़ चुका था। उन्होंने बिना अपना सिर घुमाए मुझसे पूछा कि क्या तुमने मेरी खोई हुई मंजिल देखी है। डर के मारे मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं भागकर अपनी कार में बैठ गया, लेकिन कार का इंजन लाख कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हुआ। वो भयानक आकृति धीरे-धीरे मेरी कार के शीशे के पास आने लगी और फिर सब कुछ अंधेरे में डूब गया।

अंधेरे कमरे का रहस्य

हमारे नए मकान का एक कमरा हमेशा ठंडा रहता था और वहां से अजीब सी सरसराहट की आवाजें आती थीं। मैंने एक रात हिम्मत करके उस कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर कोई नहीं था, बस एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी जो खुद-ब-खुद हिल रही थी। उस पर धूल की परत जमी थी जिस पर किसी छोटे बच्चे के नंगे पैरों के निशान बन रहे थे। अचानक कमरे की खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई और हवा में एक डरावनी फुसफुसाहट गूंजी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखना चाहा तो कोई अदृश्य शक्ति ने मेरा गला दबोच लिया और मेरी सांसें रुकने लगीं। किसी तरह मैंने खुद को छुड़ाया और उस घर से बाहर भागा, लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वो परछाई मेरा पीछा कर रही है।

पुराने कुएं का सच

गाँव के बाहर बने एक सुनसान खेत में एक पुराना कुआँ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें से रात को संगीत की आवाजें आती हैं। राहुल और उसके दोस्तों ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए रात के समय उस कुएं के पास जाने की योजना बनाई। जब वे वहां पहुंचे, तो वास्तव में कुएं के भीतर से घुंघरू की छनक और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था। राहुल ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी कुएं के अंदर डाली, पानी में तैरता हुआ एक चेहरा दिखाई दिया जो जोर-जोर से हंस रहा था। उसी पल राहुल के दोस्तों के पैर जमीन में धंस गए और कुएं से एक लंबा हाथ बाहर निकल आया।

आखरी बस की सवारी

रोहन अपने दफ्तर से लौट रहा था और रात काफी हो चुकी थी। उसने घर जाने के लिए हाईवे पर आखिरी बस पकड़ी। बस के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल एक मंद सी रोशनी जल रही थी। ड्राइवर ने बिना किसी से कुछ कहे बस चलाना शुरू कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद रोहन ने देखा कि बस में बैठे बाकी यात्री अजीब तरह से चुप थे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जब रोहन ने कंडक्टर से टिकट मांगा, तो कंडक्टर ने अपनी गर्दन घुमाई और उसकी आँखें गायब थीं। तभी उसे याद आया कि यह वही बस थी जो पिछले हफ्ते एक भयानक दुर्घटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

पहाड़ की ढलान पर नन्हा पौधा

हिमालय की ऊँची और ठंडी पहाड़ियों के बीच एक बहुत बड़ा पत्थर था। उस कठोर पत्थर की एक छोटी सी दरार में जाने कहाँ से एक नन्हे पौधे का बीज आ गिरा था। आसपास की मिट्टी नाममात्र की थी और सर्द हवाएं लगातार उस पर थपेड़े मार रही थीं। बड़े-बड़े पेड़ों ने उस पौधे को देखकर कहा कि यहाँ तुम्हारा जीवित रहना असंभव है, क्योंकि न तो तुम्हें पर्याप्त धूप मिलेगी और न ही पानी। लेकिन उस नन्हे बीज ने हार मानने के बजाय चुपचाप अपनी जड़ें उस पत्थर की गहराई में उतरनी शुरू कर दीं। उसने अपनी छोटी सी पत्तियों से हर बूंद ओस को सहेजना सीखा। साल बीतते गए, मौसम कई बार बदले, आंधियाँ आईं और बर्फबारी भी हुई। धीरे-धीरे उस पौधे की जड़ें इतनी मजबूत हो गईं कि उन्होंने उस बड़े पत्थर को भीतर से थाम लिया। कुछ सालों बाद वही नन्हा पौधा एक मजबूत और सुंदर वृक्ष बन गया, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। उसने साबित कर दिया कि जीवन की परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि आगे बढ़ने की सच्ची लगन हो, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती है।

पुरानी बक्से में रखी डायरी

अमित को अपने दादाजी की अलमारी के कोने में एक बहुत पुरानी और धूल से भरी डायरी मिली। जब उसने उसे खोला, तो उसने पाया कि उसके दादाजी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में कितनी असफलताएँ झेली थीं। हर पन्ने पर असफलता के बाद किए गए नए प्रयोगों और कभी हार न मानने वाले संकल्प की एक लंबी दास्तान लिखी हुई थी। अमित खुद अपने जीवन में एक बड़े व्यापारिक घाटे के बाद पूरी तरह से टूट चुका था और घर बैठकर निराशा में अपना समय बिता रहा था। उसने जब उन पन्नों को ध्यान से पढ़ा, तो उसे महसूस हुआ कि उसके दादाजी ने उससे भी कहीं अधिक कठिन समय का सामना किया था। उस डायरी के शब्दों ने अमित के अंदर एक नई ऊर्जा और काम करने की एक अजीब सी ललक जगा दी। उसने अपनी पुरानी गलतियों से सबक लिया और नए सिरे से अपने काम की शुरुआत करने का पक्का निर्णय कर लिया। कुछ ही महीनों की कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बाद, उसका व्यापार फिर से चमक उठा और वह अपनी मंजिल पा गया।

बर्फ से ढकी चोटी और पर्वतारोही

हिमालय की बर्फीली वादियों में सोहन का सपना माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक अकेले पहुँचने का था। उसने कई बार असफलताओं का सामना किया था, लेकिन उसके भीतर का जोश कभी कम नहीं हुआ। एक दिन जब मौसम बहुत खराब हो गया और तेज बर्फीला तूफान चलने लगा, तो उसके सारे साथियों ने वापस लौटने का फैसला कर लिया। सोहन के सामने भी एक बड़ा संकट खड़ा हो गया कि वह आगे बढ़े या दूसरों के साथ लौट आए। उसने थोड़ी देर रुककर अपने दिल की आवाज सुनी और अपनी क्षमता पर पूरा विश्वास रखा। उसने अपने कदम फिर से आगे की तरफ बढ़ाए और धीरे-धीरे ही सही, लेकिन लगातार चलता रहा। कुछ घंटों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद, उसने आखिरकार उस लक्ष्य को हासिल कर लिया जिसका उसने सपना देखा था। इस अद्भुत सफलता ने उसे सिखाया कि रास्ते चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, यदि आपका इरादा पक्का है और हौसला बुलंद है, तो हर असंभव दिखने वाली मंजिल को आसानी से पाया जा सकता है।