रोशनी की तलाश
अंधेरों से अब कोई डर नहीं लगता, क्योंकि उजाले से भी अब घर नहीं लगता। रोशनी के इंतजार में आंखें थक गई हैं, अब इन आंसुओं पर भी असर नहीं लगता।
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