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"रात" के लिए परिणाम

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कुल 299 परिणाम मिले खोज शब्द: रात

अंतिम ट्रेन का मुसाफिर

सोहन रात की आखिरी लोकल ट्रेन से अपने गाँव लौट रहा था। डिब्बा पूरी तरह खाली था और बाहर घना कोहरा छाया हुआ था। तभी एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका आया और उसके सामने वाली सीट पर एक महिला आकर बैठ गई, जिसका चेहरा सफेद चादर से ढंका हुआ था। सोहन ने डरते हुए उससे पूछा कि आप कहाँ जा रही हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब ट्रेन एक सुनसान सुरंग में पहुँची, तो महिला ने अपनी चादर हटाई। उसके चेहरे की जगह केवल एक धधकता हुआ गड्ढा था। ट्रेन की ब्रेक फेल हो चुकी थी और उस वीरान सुरंग में सोहन की चीखें हमेशा के लिए खो गईं।
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अटेरी की पुरानी डायरी

विक्रम को अपने नए पुराने घर की अटारी में एक धूल भरी डायरी मिली। डायरी के पन्ने पलटने पर उसे पता चला कि उसमें जो भी भविष्य की घटनाएँ लिखी थीं, वे सच साबित हो रही थीं। उसने उत्सुकतावश आगे के पन्ने पढ़े और सन्न रह गया। उस पर लिखा था कि आज रात ठीक बारह बजे विक्रम का परछाई से सामना होगा और उसकी साँसें थम जाएंगी। विक्रम ने हंसकर डायरी बंद कर दी और रात होने का इंतजार करने लगा। जैसे ही घड़ी की सुई बारह पर पहुँची, कमरे की बत्तियाँ बुझ गईं और आईने में उसकी खुद की परछाई ने मुस्कुराकर उसका गला दबाना शुरू कर दिया।
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अंधेरे कुएं की गूंज

पुश्तैनी बाग के बीच स्थित वह सूखा कुआं हमेशा से गांव वालों के लिए आकर्षण और भय का केंद्र रहा था। विक्रम ने चुनौती स्वीकार करते हुए आधी रात को उस कुएं में झांका। कुएं के अंदर से पानी की बूंदें टपकने की आवाज आ रही थी, जबकि वह पूरी तरह सूखा था। अचानक अंदर से किसी बच्चे की रोने की आवाज गूंजी। विक्रम ने टॉर्च की रोशनी नीचे डाली तो उसे पानी में उसका अपना ही चेहरा तैरता हुआ दिखा, जो क्रूरता से मुस्कुरा रहा था। अगले ही पल किसी ने उसे पीछे से गहरे कुएं में खींच लिया। सुबह उसकी टॉर्च कुएं की मुंडेर पर लावारिस मिली।
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लालटेन की रोशनी में छिपा सच

गांव के छोर पर बने एक पुराने मिट्टी के घर में सोहन अकेला रहता था। सर्द रात में जब उसने लालटेन जलाई, तो कमरे के कोने में एक अजीब सी परछाई हिलती हुई दिखाई दी। उसने सोचा यह उसका अपना साया होगा, लेकिन परछाई का हाथ स्वतंत्र रूप से उठ रहा था। डर के मारे सोहन का गला सूख गया और जब उसने भागने की कोशिश की, तो दरवाजे पर किसी ने अंदर से भारी ताला लगा दिया। तभी कोने से एक फुसफुसाती हुई आवाज आई, "अब तुम इस घर से कभी बाहर नहीं जा पाओगे।" सुबह जब ग्रामीण वहां पहुंचे, तो घर के अंदर सिर्फ एक बुझी हुई लालटेन और सोहन की घड़ी मिली।
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आधी रात का रेडियो प्रसारण

विकास को पुराने रेडियो सुनने का अजीब शौक था। एक दिन उसने अपना पुराना ट्रांजिस्टर ऑन किया और उसकी सुई घुमाने लगा। सभी आवृत्तियों पर केवल सन्नाटा था, सिवाय एक के जिस पर कोई पुरानी दर्द भरी आवाज में भविष्यवाणी कर रहा था। उस आवाज ने बिल्कुल ठीक वही बातें कहीं जो विकास उस समय अपने कमरे में कर रहा था। विकास डर गया और उसने रेडियो का स्विच ऑफ करके सेल निकाल दिए, लेकिन फिर भी वह आवाज उसी गति से बजती रही। अचानक रेडियो से एक हाथ बाहर निकला और विकास के कंधे को कसकर पकड़ लिया। जब सुबह उसकी मां कमरे में आईं, तो रेडियो चालू था और विकास की सांसें थम चुकी थीं।
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रेगिस्तान के बीचों-बीच खड़ी हवेली

सड़कों से भटककर तीन दोस्त रात के समय रेगिस्तान के बीचों-बीच बने एक प्राचीन किले नुमा घर के पास पहुंचे। उन्होंने सोचा कि सुबह तक यहीं आराम किया जाए। घर के अंदर प्राचीन फर्नीचर और जलाई गई मोमबत्तियां देखकर उन्हें हैरानी हुई जैसे कोई उनका ही इंतजार कर रहा हो। तभी भारी लकड़ी का मुख्य दरवाजा अपने आप जोर से बंद हो गया और उसकी कुंडी लग गई। कमरों से अजीब सी फुसफुसाहट और हंसने की आवाजें आने लगीं। जब दोस्तों ने भागने की कोशिश की, तो रेत के टीले के बीच से कई साये उनकी तरफ बढ़ते हुए दिखाई दिए। सुबह होने पर वहां सिर्फ कुछ पुरानी हड्डियां और उनकी गाड़ी का टूटा हुआ पहिया मिला।
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दूसरी मंजिल की खाली खिड़की

रोहित अपने परिवार के साथ एक नए किराए के मकान में रहने आया था। मकान का किराया बहुत कम था क्योंकि उसके बारे में मोहल्ले में कई तरह की बातें मशहूर थीं। घर की दूसरी मंजिल पर एक खिड़की थी जिस पर हमेशा काले रंग का पर्दा पड़ा रहता था। रोहित के लाख मना करने के बावजूद उसके छोटे बेटे ने एक दिन जिज्ञासावश वह पर्दा हटा दिया। उस पल के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रात को उस खिड़की के शीशे पर बाहर से किसी के नाखून खुरचने की आवाजें आने लगीं और घर के सभी नल अपने आप खुलने लगे। जब उन्होंने मकान मालिक से पूछा, तो पता चला कि उस खिड़की के सामने खड़े होकर किसी ने आत्महत्या की थी और उसकी रूह आज भी वहीं भटकती है।
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अक्सर बंद रहने वाले गोदाम का खौफ

शहर के पुराने बाजार में एक ऐसा गोदाम था जो पिछले तीस साल से हमेशा बंद रहता था। व्यापारी राघव ने सस्ते दाम मिलने पर उसे खरीद लिया और सफाई का काम शुरू किया। जैसे ही मजदूरों ने उसका भारी लोहे का दरवाजा खोला, अंदर से सड़े हुए फूलों और पुरानी धूल की तेज गंध बाहर आई। उस रात जब राघव गोदाम के कागजात देखने रुका, तो उसे कोनों से किसी के घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी। उसने हिम्मत करके टार्च की रोशनी डाली, तो हवा में तैरती हुई एक धुंधली सी आकृति नजर आई जो तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगी। डर के मारे राघव बेहोश हो गया और सुबह जब उसे होश आया, तो गोदाम का दरवाजा अंदर से बंद था और बाहर उसकी खुद की चीखने की आवाज गूंज रही थी।
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खिड़की पर दस्तक देती उंगलियां

चौथी मंजिल के फ्लैट में रहने वाली निकिता अक्सर रात को खिड़की के बाहर किसी के होने का अहसास करती थी। उसका फ्लैट सड़क से बहुत ऊपर था, इसलिए वहां किसी इंसान का पहुंचना नामुमकिन था। एक तूफानी रात को जब बिजली गुल हो चुकी थी, तब खिड़की के कांच पर किसी ने हल्के से नाखून से खरोंचना शुरू किया। निकिता ने डरते हुए टॉर्च जलाई और खिड़की की तरफ देखा। कांच के उस पार एक औरत लटकी हुई थी जिसके बाल बिखरे हुए थे और वह अजीब सी मुस्कान के साथ उसे घूर रही थी। उस औरत ने अचानक खिड़की का कांच जोर से पीटना शुरू कर दिया ताकि वह अंदर आ सके। निकिता चीख पड़ी और अपनी चाची के कमरे की तरफ भागी। अगली सुबह जब खिड़की खोली गई, तो वहां कांच पर ताजे खून के निशान बने हुए थे और कोई नहीं था।
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चित्रकार का आखिरी कैनवास

अमित को पुरानी पेंटिंग बनाने का बहुत शौक था। उसने बाजार से एक पुरानी और गंदी सी पेंटिंग खरीदी जिसे साफ करके वह उसपर अपनी नई कला उकेरना चाहता था। जैसे ही उसने उस पेंटिंग की ऊपरी परत को पानी से साफ किया, उसके नीचे एक और भयानक चेहरा उभर आया। वह चेहरा किसी राक्षस का लग रहा था जिसकी आंखें खून से लाल थीं। अमित ने सोचा कि यह कोई भ्रम होगा और उसने सोना शुरू कर दिया। रात को उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसकी छाती पर बैठा हो और उसका दम घुट रहा हो। जब उसने अपनी आंखें खोलीं, तो उसने देखा कि पेंटिंग वाला राक्षस दीवार से बाहर निकलकर उसके बिस्तर के पास खड़ा था। सुबह जब पुलिस आई, तो अमित का शरीर बिस्तर पर बेजान था और कैनवास पर एक नया खून से रंगा हुआ चित्र बना हुआ था।
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रसोई से आती अजीब आवाजें

नयी नौकरी मिलने के बाद शहर के एक सुनसान इलाके में सोहन ने किराए पर एक मकान लिया। मकान बहुत सस्ता था क्योंकि उसके पिछले मालिक के साथ कुछ अनहोनी हुई थी। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर रात कोसोईघर से बर्तन गिरने की आवाजें आने लगीं। सोहन जब भी देखने जाता, वहां सब कुछ अपनी जगह पर व्यवस्थित मिलता और कोई नहीं होता। एक रात आवाजें बहुत तेज हो गईं और प्लेटें हवा में उड़ने लगीं। सोहन ने हिम्मत करके रसोई का दरवाजा खोला तो देखा कि एक धुंधली परछाई हवा में तैर रही थी। परछाई ने धीरे से मुड़कर सोहन की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर कोई आंखें नहीं थीं। उस भयानक दृश्य को देखकर सोहन बेहोश हो गया और होश आने पर उसने उसी रात वह घर हमेशा के लिए छोड़ दिया।
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रात के सन्नाटे में गूंजता संगीत

हर रात ठीक बारह बजे पुराने हवेली के खंडहर से किसी पुराने ग्रामोफोन की आवाज सुनाई देती थी। गांव वाले उस तरफ जाने से डरते थे क्योंकि जो भी वहां गया, वह कभी लौट कर नहीं आया। राहुल एक यूट्यूबर था, जो इस रहस्य को सुलझाने के लिए उस हवेली के अंदर पहुंच गया। उसने देखा कि एक टूटा हुआ ग्रामोफोन हवा में अपने आप चल रहा था। जैसे ही उसने कैमरा उसकी तरफ घुमाया, मशीन की सुई रुक गई और सन्नाटा छा गया। अचानक पीछे से एक ठंडी सांस उसकी गर्दन पर महसूस हुई और एक भारी आवाज ने कहा, क्या तुम्हें मेरा संगीत पसंद आया? राहुल भागने के लिए मुड़ा, लेकिन दरवाजे पर किसी अदृश्य दीवार ने उसका रास्ता रोक लिया। सुबह जब गांव वालों ने दरवाजा खोला, तो वहां सिर्फ एक चालू ग्रामोफोन मिला और राहुल का कैमरा जमीन पर पड़ा था।
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