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पुरानी हवेली की खिड़की

गाँव के छोर पर स्थित वह पुरानी हवेली सदियों पुरानी कहानियों की गवाह थी। कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं करता था, सिवाय अक्षित के, जो उस हवेली के जीर्णोद्धार का काम संभाल रहा था। एक दिन काम के दौरान उसे धूल से सनी एक पुरानी डायरी मिली, जिसके पन्नों पर अंजलि नाम की किसी लड़की के खूबसूरत खत लिखे थे। वे खत आज से पचास साल पुराने थे, जो किसी ऐसे शख्स के लिए थे जो कभी उन तक पहुँच ही नहीं पाया। अक्षित उन खतों के शब्दों में इस तरह खो गया कि उसे हवेली से ज्यादा उन भावनाओं की फिक्र होने लगी। तभी एक दिन एक वृद्ध महिला अपनी पोती नैना के साथ उस हवेली को देखने आईं। वह महिला कोई और नहीं बल्कि उसी अंजलि की बेटी थीं, जो अपनी माँ की आखिरी इच्छा पूरी करने आई थीं। नैना और अक्षित जब मिले, तो दोनों को लगा कि वे सदियों से एक-दूसरे को जानते हैं। अतीत के उन पन्नों ने वर्तमान में दो अजनबी दिलों को हमेशा के लिए एक अटूट बंधन में बांध दिया।

रेत पर लिखे नाम

समुद्र की लहरें किनारे को बार-बार छू रही थीं और सूरज डूबने की तैयारी में था। कबीर और मीरा हर साल इस समुद्री तट पर आते थे क्योंकि यहीं उनकी पहली मुलाकात हुई थी। इस बार माहौल थोड़ा अलग था क्योंकि कबीर शहर छोड़कर विदेश जाने वाला था और दूरी उनके रिश्ते की परीक्षा लेने वाली थी। मीरा चुपचाप रेत पर कबीर का नाम लिख रही थी और लहरें उसे मिटा रही थीं। कबीर ने मीरा का हाथ थाम लिया और कहा कि नाम भले ही रेत से मिट जाए, लेकिन दिल पर लिखा रिश्ता कभी नहीं मिटेगा। उस शाम दोनों ने वादा किया कि समुद्र की दूरियों के बावजूद उनका प्यार हमेशा अमर रहेगा।

दर्द-ए-दिल

खामोशी से टूट जाने का हुनर सीख लिया,
हमने खुद से ही खुद को जुदा कर लिया।
कोई गिला नहीं इस बेरुखी ज़माने से,
हमने तन्हाई को अपना हमसफर बना लिया।

टूटा हुआ विश्वास

कुछ रिश्ते वक्त के साथ ऐसे छूटे, जैसे पतझड़ में पेड़ से सूखे पत्ते टूटते हैं। अब तो खुद की आवाज से भी डर लगने लगा है, क्योंकि हर खुशी के पीछे एक छिपा हुआ धोखा नजर आता है।

टूटते तारे

रात के अंधेरे में टूटते तारे को देख कर, हमने भी अपनी किसी हसरत को रुखसत कर दिया। जो अपना कभी हो ही नहीं सका, उसे दिल से बेदखल कर दिया।

टूटे अरमान

बचपन के खिलौनों की तरह संजोए थे कुछ हसीन सपने, जिन्हें हकीकत की आंधी ने पलभर में धूल बना दिया। अब तो कांच की तरह बिखर चुका है मेरा हर एक सपना।

टूटा विश्वास

भरोसे की नींव पर जो आशियाना बनाया था, एक ही झटके में वो सब ढह गया। हमने तो हर पल चाहा था भला जिसका, वही शख्स आज हमें रुला कर गया।

बिछड़े रास्ते

वक्त के साथ सब बदल गया यहां, हमारा साया भी अब हमसे रूठ गया। उम्मीदों की जो डोर थामी थी हमने, वो एक झटके में आज टूट गया।