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कागज़ की कश्तियाँ

बरसात की पहली बूँद ने सूखी मिट्टी को महका दिया था। कॉलेज के गलियारे में अहान और मीरा अपने नोट्स बचाते हुए एक कैंटीन के शेड के नीचे आकर खड़े हो गए। दोनों के बीच ज़्यादा बातचीत नहीं थी, बस एक अनकही सी खामोश पहचान थी जो पिछले कुछ महीनों से पनप रही थी। अचानक अहान ने अपनी जेब से एक पुराना कागज़ निकाला और फुर्ती से एक छोटी सी नाव बना डाली। उसने उसे पानी की बहती धारा में छोड़ते हुए कहा कि हमारी उम्मीदें भी इसी नाव जैसी हैं, जो हर लहर से लड़कर आगे बढ़ती हैं। मीरा मुस्कुराई और उसने अपनी किताब से एक सूखा पत्ता निकालकर उस नाव पर रख दिया। उस छोटे से पल ने दोनों के दिलों के फासलों को हमेशा के लिए मिटा दिया और एक नए रिश्ते की खूबसूरत शुरुआत हुई।

मद्धम रोशनी का दिया

दीवाली की जगमगाती शाम में पूरा शहर रोशनी से नहाया हुआ था, लेकिन तरुण के छोटे से मिट्टी के बर्तन की दुकान पर सन्नाटा पसरा था। इस बार उसकी बनाई गई दीये की कलाकृतियां बिक नहीं पाई थीं, जिससे उसका मन बहुत उदास था। वह अपनी अधूरी किस्मत को कोस रहा था कि तभी दुकान पर एक युवा लड़की ईशा आई। ईशा ने न सिर्फ तरुण के सारे दीये खरीद लिए, बल्कि उसकी कला की दिल खोलकर तारीफ भी की। तरुण की आँखों में चमक लौट आई और उसने ईशा को धन्यवाद देने के लिए एक विशेष दीया उपहार में दिया। अगले साल उसी दीवाली पर ईशा फिर से उस दुकान पर आई, लेकिन इस बार वह अकेلی नहीं थी, बल्कि तरुण के जीवन की हमसफर बनकर आई थी। दोनों ने मिलकर उस छोटी सी दुकान को एक बड़े हस्तशिल्प केंद्र में बदल दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि सच्चे प्यार का दिया जब एक बार जल जाए, तो उसकी रोशनी कभी फीकी नहीं पड़ती और हर अंधेरे को आसानी से हरा सकती है।

रौशन सवेरा

रात कितनी भी लंबी हो, सुबह जरूर आती है,
हर नई किरण एक नई उम्मीद जगा जाती है।
छोड़ दो कल की फिक्र मेरे नादान दोस्त,
आज की यह सुबह नई सफलता लाती है।

रेत के महल

हमने समंदर किनारे जो उम्मीद के महल बनाए थे, लहरों ने एक ही झटके में सब कुछ बहा दिया और हम देखते रह गए।

बंजर जमीन

दिल की जमीन पर उम्मीदों के फूल उगाए थे,
मगर बेवक्त की आंधियों ने सब झुलसा दिया।
अब तो खुद की परछाई से भी डर लगता है हमें,
किस्मत ने ऐसा मंशा का शीशा गिरा दिया।

रोशनी की तलाश

अंधेरों से अब कोई डर नहीं लगता, क्योंकि उजाले से भी अब घर नहीं लगता। रोशनी के इंतजार में आंखें थक गई हैं, अब इन आंसुओं पर भी असर नहीं लगता।

बेवजह की उम्मीद

तुझसे कोई गिला ना कोई शिकवा रहा, बस खुद से ही एक पुराना झगड़ा रहा। हर बार चाहा कि भूल जाएं तुझे, पर दिल हर बार तेरी ओर मुड़ता रहा।