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पुरानी हवेली की परछाइयां

गांव के छोर पर बनी खंडहर नुमा हवेली में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता था, लेकिन कबीर ने एक शर्त के तहत वहां जाने का फैसला किया। उसने हाथ में टॉर्च ली और लकड़ी के चरमराते दरवाजे को धक्का देकर अंदर कदम रखा। अंदर कदम रखते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे सैकड़ों आंखें एक साथ उसी को घूर रही हों। उसने टॉर्च की रोशनी दीवारों पर डाली, जहाँ पुरानी तस्वीरें टंगी थीं और हर तस्वीर की आंखें उसकी तरफ घूम रही थीं। अचानक एक भारी आवाज गूंजी कि यहाँ से कभी कोई वापस नहीं गया, और दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

नीली रोशनी का साया

रोहन ने जब अपने नए कमरे में प्रवेश किया, तो उसे दीवारों पर अजीब से नीले धब्बे दिखाई दिए। उसे लगा कि शायद यह सीलन का असर होगा, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात के ठीक बारह बजे, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया और एक अजीब सी फुसफुसाहट सुनाई देने लगी। रोहन ने उठकर देखा तो कोने में रखी पुरानी अलमारी अपने आप खुल रही थी। अलमारी के भीतर से कोई अदृश्य ताकत बाहर आई और उसके ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। उसने डरकर आंखें बंद कर लीं और जब सुबह हुई, तो वह कमरा पूरी तरह बदल चुका था।

रेगिस्तान की सुनसान हवेली

राजस्थान के एक वीरान इलाके में बने पुराने किलेनुमा मकान में सोहन ने एक रात बिताने का फैसला किया। चारों तरफ सिर्फ रेत और खामोश रात का अंधेरा था। जब रात के दो बजे, तो अचानक भारी दरवाजों के अपने आप खुलने और बंद होने की आवाजें आने लगीं। सोहन ने टॉर्च जलाकर देखा, तो दीवार पर लटकी पुरानी पेंटिंग में बने राजा की आंखें जीवित हो उठी थीं और वह उसे घूर रहा था। कमरे का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिर गया और पैरों तले रेत खिसकने लगी। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा, लेकिन पीछे से गूंजती हंसी आज भी उसके कानों में गूंजती है।

पुरानी घड़ी की सुई

अजय को एंटीक घड़ियाँ जमा करने का शौक था। उसने शहर की एक पुरानी दुकान से एक ऐसी दीवार घड़ी खरीदी जिसकी सुइयां हमेशा उल्टी दिशा में घूमती थीं। रात के ठीक तीन बजे उस घड़ी से टिक-टिक की आवाज के साथ तेज सायरन जैसी आवाज आने लगी। अजय ने जब उसे उतारने की कोशिश की, तो दीवार पर एक परछाई उभर कर सामने आई जो बिल्कुल उसकी अपनी नकल थी लेकिन उसकी आँखें लाल थीं। परछाई ने दीवार से बाहर निकलकर अजय का गला पकड़ लिया और अगले दिन वह घड़ी फिर से अपनी सामान्य रफ्तार से चलने लगी।

सूनसान सड़क की लिफ्ट

कार से घर लौटते वक्त राहुल की गाड़ी एक सुनसान हाइवे पर अचानक खराब हो गई। चारों तरफ घना कोहरा था और मोबाइल के सिग्नल पूरी तरह गायब थे। तभी सड़क किनारे एक सफेद लिबास पहने औरत ने लिफ्ट के लिए हाथ उठाया। राहुल ने इंसानियत दिखाते हुए उसे गाड़ी में बिठा लिया, लेकिन गाड़ी के अंदर आते ही अजीब सी सड़ी हुई गंध फैल गई। जब राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा, तो उस औरत की आंखें गायब थीं और उसका चेहरा खून से सना हुआ था। उसने चीखकर ब्रेक मारा, लेकिन तब तक गाड़ी एक गहरी खाई में गिर चुकी थी।

चित्रकार का आखिरी कैनवास

अमित को पुरानी पेंटिंग बनाने का बहुत शौक था। उसने बाजार से एक पुरानी और गंदी सी पेंटिंग खरीदी जिसे साफ करके वह उसपर अपनी नई कला उकेरना चाहता था। जैसे ही उसने उस पेंटिंग की ऊपरी परत को पानी से साफ किया, उसके नीचे एक और भयानक चेहरा उभर आया। वह चेहरा किसी राक्षस का लग रहा था जिसकी आंखें खून से लाल थीं। अमित ने सोचा कि यह कोई भ्रम होगा और उसने सोना शुरू कर दिया। रात को उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसकी छाती पर बैठा हो और उसका दम घुट रहा हो। जब उसने अपनी आंखें खोलीं, तो उसने देखा कि पेंटिंग वाला राक्षस दीवार से बाहर निकलकर उसके बिस्तर के पास खड़ा था। सुबह जब पुलिस आई, तो अमित का शरीर बिस्तर पर बेजान था और कैनवास पर एक नया खून से रंगा हुआ चित्र बना हुआ था।

रसोई से आती अजीब आवाजें

नयी नौकरी मिलने के बाद शहर के एक सुनसान इलाके में सोहन ने किराए पर एक मकान लिया। मकान बहुत सस्ता था क्योंकि उसके पिछले मालिक के साथ कुछ अनहोनी हुई थी। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर रात कोसोईघर से बर्तन गिरने की आवाजें आने लगीं। सोहन जब भी देखने जाता, वहां सब कुछ अपनी जगह पर व्यवस्थित मिलता और कोई नहीं होता। एक रात आवाजें बहुत तेज हो गईं और प्लेटें हवा में उड़ने लगीं। सोहन ने हिम्मत करके रसोई का दरवाजा खोला तो देखा कि एक धुंधली परछाई हवा में तैर रही थी। परछाई ने धीरे से मुड़कर सोहन की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर कोई आंखें नहीं थीं। उस भयानक दृश्य को देखकर सोहन बेहोश हो गया और होश आने पर उसने उसी रात वह घर हमेशा के लिए छोड़ दिया।

बंद बक्से का राज़

अमित को उसके दादाजी की अटारी से एक लोहे का पुराना बक्सा मिला था। बक्से पर कई ताले लगे थे और उस पर चेतावनी खुदी थी कि इसे कभी न खोला जाए। जिज्ञासा के वश में आकर अमित ने एक रात लोहे की रॉड से बक्से का मुख्य ताला तोड़ दिया। जैसे ही ढक्कन उठा, उसमें से एक ठंडी और सड़ी हुई हवा का झोंका निकला, जिसके साथ बच्चों के रोने की बहुत ही धीमी आवाज़ें आ रही थीं। बक्से के अंदर कोई खजाना नहीं था, बल्कि एक पुरानी तस्वीर थी जिस पर अमित का ही चेहरा बना हुआ था, और उसकी आँखें धीरे-धीरे खून से लाल हो रही थीं।

आखरी बस की सवारी

रोहन अपने दफ्तर से लौट रहा था और रात काफी हो चुकी थी। उसने घर जाने के लिए हाईवे पर आखिरी बस पकड़ी। बस के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल एक मंद सी रोशनी जल रही थी। ड्राइवर ने बिना किसी से कुछ कहे बस चलाना शुरू कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद रोहन ने देखा कि बस में बैठे बाकी यात्री अजीब तरह से चुप थे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जब रोहन ने कंडक्टर से टिकट मांगा, तो कंडक्टर ने अपनी गर्दन घुमाई और उसकी आँखें गायब थीं। तभी उसे याद आया कि यह वही बस थी जो पिछले हफ्ते एक भयानक दुर्घटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

समुद्र तट पर बिखरे सीप

सुबह की ठंडी हवा में एक बूढ़ा व्यक्ति समुद्र तट पर टहल रहा था और रेत पर बिखरे सीपों को ध्यान से देख रहा था। उसके साथ चल रहा युवा पोता यह सब देखकर हैरान था कि दादाजी हर साधारण सीप को उठाकर क्यों देख रहे हैं। तभी दादाजी को एक ऐसा सीप मिला जिसके भीतर एक चमकता हुआ मोती था, जिसे देखकर दोनों की आँखें खुशी से चमक उठीं। दादाजी ने पोते को बताया कि जैसे समुद्र की लहरें हर सीप को कीमती नहीं बनातीं, वैसे ही जीवन के थपेड़े हमें मजबूत और अनमोल बनाते हैं। इस सीख ने युवक की सोच को पूरी तरह बदल दिया और उसने अपने कठिन दिनों को एक अवसर के रूप में देखना शुरू कर दिया।

नीले आसमान का खुला आकाश

एक छोटा सा पक्षी पहली बार अपने घोंसले से बाहर आया था और नीचे गहरी खाई देखकर वह बुरी तरह काँप रहा था। उसके पंखों में अभी वह ताकत नहीं थी जो बादलों को चीर सके, इसलिए वह बार-बार पीछे हट जाता था। उसकी माँ ने उसे प्यार से समझाया कि पंख केवल शरीर का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक हैं जब तुम खुद को हवा के हवाले कर देते हो। पक्षी ने अपनी आँखें बंद कीं, अपने डर को पीछे छोड़ा और पहली बार छलांग लगा दी। हवा ने उसके पंखों को थामा और वह आसमान की ऊंचाइयों को छूने लगा, यह सिखाते हुए कि डर पर विजय पाने का नाम ही असली उड़ान है।

तारे और खुली आँखें

अमित शहर की तेज चकाचौंध से दूर एक शांत पहाड़ी गाँव में छुट्टियां बिताने गया था। रात को जब उसने आसमान में देखा, तो उसे अनगिनत तारे टिमटिमाते हुए दिखाई दिए। शहर के प्रदूषण में वह इन नजारों को भूल चुका था। उन चमकते तारों को देखकर उसे अहसास हुआ कि असली रोशनी भीतर से आती है, बाहर की चमक तो बस दिखावा है। उसने अपने सपनों को फिर से टटोलना शुरू किया जो कहीं पीछे छूट गए थे। उसने ठान लिया कि वह अपनी असली पहचान बनाएगा और बिना किसी दिखावे के अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ेगा। वह रात उसके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गई।