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पहाड़ की चोटी और चील

हिमालय की बर्फीली वादियों में एक चील का बच्चा रहता था, जो दूसरे पक्षियों की देखा-देखी खुद को बहुत कमजोर समझता था। उसे लगता था कि वह कभी भी उस ऊंचे पहाड़ की चोटी तक नहीं उड़ पाएगा क्योंकि उसके पंख बहुत छोटे हैं। एक दिन घाटी में भयंकर तूफान आया, जिससे सभी छोटे पक्षी डरकर अपनी गुफाओं में छिप गए। चील के बच्चे को अपनी जान बचाने के लिए उड़ना ही पड़ा क्योंकि उसका घोंसला खतरे में था। जैसे ही उसने हवा का सामना करते हुए अपने पंख पसारे, उसे महसूस हुआ कि हवा उसे नीचे धकेलने के बजाय आसमान की तरफ उठा रही है। वह उड़ता गया और आखिरकार उसी पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर जा पहुंचा, जहां से पूरी दुनिया बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी। उसका सारा डर एक ही पल में गायब हो गया और उसने अपनी असली ताकत को पहचान लिया।

घने जंगल में जलती मशाल

बहुत समय पहले की बात है, एक युवा यात्री घने और डरावने जंगल में रास्ता भटक गया था। चारों तरफ घना अंधकार था और जंगली जानवरों की आवाज़ें आ रही थीं, जिससे उसका दिल डर से कांपने लगा। वह एक पेड़ के नीचे सहम कर बैठ गया और सोचने लगा कि अब उसका बचना असंभव है। तभी उसे एक पुराने बक्से में एक छोटी सी सूखी लकड़ी और पत्थर मिला। उसने हार मानने के बजाय पूरी ताकत से उन पत्थरों को आपस में रगड़ा। कई असफल कोशिशों के बाद आखिरकार एक छोटी सी चिंगारी निकली, जिससे उसने एक मशाल जला ली। उस मशाल के उजाले में उसे आगे का रास्ता साफ दिखाई देने लगा और वह सुरक्षित बाहर निकल आया। यह घटना सिखाती है कि जीवन की अंधेरी रातों में भी यदि हम हिम्मत न हारें और खुद प्रयास करें, तो एक छोटी सी उम्मीद भी बड़ा रास्ता दिखा सकती है।

एकता की शक्ति और नन्हीं चीटियां

बरसात के दिनों में एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे चीटियों का एक छोटा सा परिवार रहता था। एक दिन तेज आंधी के कारण खाने का एक बड़ा दाना उनके रास्ते में आकर गिर गया, जिसे अकेली चींटी हिला भी नहीं सकती थी। रानी चींटी ने हार मानने के बजाय अपनी पूरी फौज को इकट्ठा किया और सबने मिलकर एक साथ ताकत लगाई। कुछ ही पलों में वह भारी दाना अपनी मंजिल तक पहुँच गया। इस घटना को पास की डाल पर बैठा एक कबूतर देख रहा था, जिसे एकता का असली मतलब समझ आ गया। उसने सोचा कि जब ये नन्हीं चीटियां मिलकर बड़े से बड़ा काम कर सकती हैं, तो हम मिलकर समाज में क्यों नहीं सुधार ला सकते।

नदी की सच्ची धारा

हिमालय की ऊँची वादियों से निकलकर एक युवा नदी बड़ी तेजी से बहती हुई आगे बढ़ रही थी। नदी को अपने वेग और सुंदरता पर बहुत अधिक घमंड था कि वह हर रास्ते को अपनी ताकत से चीरकर आगे निकल सकती है। रास्ते में एक बहुत बड़ा और प्राचीन पत्थर आया जो नदी के बहाव को रोकने की कोशिश कर रहा था। नदी ने गुस्से में आकर अपनी पूरी ताकत उस पत्थर पर लगा दी ताकि उसे अपने रास्ते से पूरी तरह हटा सके। लेकिन जितना अधिक वह जोर लगाती, पत्थर अपनी जगह से टस से मस नहीं होता था और नदी का पानी बिखर जाता था। तभी उस पत्थर ने नदी से बहुत ही शांत स्वर में कहा कि हे बहने वाली धारा, केवल विरोध करने से कभी रास्ते नहीं बनते बल्कि अपनी दिशा को थोड़ा बदलकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमत्ता है। नदी को उसकी बात समझ आ गई और उसने जिद छोड़कर अपनी धारा को थोड़ा मोड़ा और सहजता से आगे बढ़ गई। आगे जाकर वही नदी एक विशाल सागर में मिल गई और उसने पाया कि लचीलापन और समझदारी ही सबसे बड़ी शक्ति होती है। इस प्रकार नदी ने अपने जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सबक सीख लिया जो हर इंसान के जीवन के लिए आवश्यक है।

नन्हे पंछी की पहली उड़ान

घने जंगल की एक ऊंची डाल पर चीकू नाम का नन्हा पंछी रहता था। उसके पंख अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुए थे और उसे खुले आसमान में उड़ने से बहुत डर लगता था। उसके माता-पिता उसे रोज समझाते थे कि डर को हराए बिना आसमान की ऊंचाइयों को छूना नामुमकिन है। एक दिन जब तेज तूफान आया और पेड़ की डाली टूटने लगी, तो चीकू के पास और कोई विकल्प नहीं बचा। अपनी जान बचाने के लिए उसने डर को पीछे छोड़ा और अपने पंख फैला दिए। उस संकट के पल ने उसे सिखाया कि असली ताकत तभी बाहर आती है जब हम जोखिम उठाने का साहस दिखाते हैं।

सिक्कों की खनक

सिक्के आवाज करते हैं पर नोट हमेशा खामोश रहते हैं, इसलिए हमने भी शोर मचाना छोड़ दिया है। हमारी मौजूदगी ही विरोधियों के होश उड़ाने के लिए काफी है।

मन की ताकत

मन के हारे हार है और मन के जीते जीत,
जो कभी ना माने हार वही रचता है रीत।
अपने भीतर की ताकत को पहचानो जरा,
तू ही है जो लिख सकता है अपनी ही जीत।