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हाल की खोजें: खौफ घर
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समुद्र किनारे का वीरान लाइटहाउस

तटीय इलाके का वह पुराना लाइटहाउस पिछले पचास सालों से बंद पड़ा था। विक्रम को रोमांचक जगहों पर घूमने का शौक था, इसलिए वह उस खण्डहर नुमा लाइटहाउस के अंदर चला गया। अंदर सीढ़ियां बहुत संकरी थीं और दीवारों पर नमी से अजीब सी बदबू आ रही थी। सबसे ऊपर पहुंचकर उसने खिड़की से समंदर की लहरों को देखा। तभी पीछे से किसी ने भारी आवाज में कहा कि यहाँ से तुरंत चले जाओ। विक्रम ने मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था, लेकिन कमरा अंदर से बंद हो चुका था। हवा का एक तेज झोंका आया और लाइटहाउस का पुराना बल्ब जल उठा। उसने देखा कि कोने में रखी कुर्सी पर एक इंसान बैठा है जिसका चेहरा गायब था। विक्रम किसी तरह जान बचाकर वहां से भागा।

रेगिस्तान की सूखी बालू में दबा राज़

जैसलमेर की सुनसान बालू पर जब रात गहरी होती है, तो रेत के टीलों से कदमों की आहट सुनाई देती है। सोहन एक फोटोग्राफर था जो रेगिस्तान की खूबसूरती कैद करने गया था। उसने शाम ढलते ही एक प्राचीन खंडहर के पास अपना कैंप लगाया। रात के सन्नाटे में उसे लगा कि कोई तंबू के बाहर मदद मांग रहा है। जब सोहन ने बाहर झांक कर देखा, तो वहां कोई नहीं था, केवल हवा के साथ उड़ती हुई रेत थी। अचानक, रेत के भीतर से एक कंकाल बाहर निकला और उसका हाथ पकड़ लिया। डर के मारे सोहन बेहोश हो गया। सुबह जब स्थानीय लोग उसे होश में लाए, तो उसने देखा कि उसकी कलाई पर वही सदियों पुराना कंगन बंधा था जो उस कंकाल के हाथ में था।

दीवार के पीछे की आहट

रोहन ने जब शहर के बाहर एक पुराना मकान बेहद कम कीमत पर खरीदा, तो उसे लगा कि उसकी किस्मत चमक गई है। लेकिन पहली ही रात उसे अपने बेडरूम की दीवार के पीछे से किसी के खरोंचने की आवाज सुनाई दी। उसने सोचा कि शायद चूहे होंगे, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अगली रात आवाजें और तेज हो गईं, मानो कोई दीवार तोड़कर बाहर आना चाहता हो। रोहन ने हथौड़ा लेकर दीवार पर वार किया तो प्लास्टर उखड़ने लगा और अंदर से एक नरकंकाल बाहर आ गिरा, जिसके हाथ में उसी मकान के कागजात थे। तभी घर का मुख्य दरवाजा अपने आप लॉक हो गया।

बंद संदूक का खौफ

अमित को अपने दादाजी के पुराने बक्से से एक हस्तलिखित डायरी मिली। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन पूरी तरह खोला, उसमें से एक ठंडी हवा का झोंका निकला और कमरे की मोमबत्तियां बुझ गईं। अंधेरे में उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसके कंधे पर हाथ रख कर कुछ पढ़ रही है। उसने तुरंत माचिस जलाई और डायरी के पन्ने पलटे तो पाया कि आखिरी पन्ने पर उसकी आज की मौत की तारीख लिखी हुई थी। ठीक उसी क्षण बक्से के अंदर से किसी ने जोर से नॉक किया और उसका दम घुटने लगा।

आधी रात का रेडियो प्रसारण

विकास को पुराने रेडियो सुनने का अजीब शौक था। एक दिन उसने अपना पुराना ट्रांजिस्टर ऑन किया और उसकी सुई घुमाने लगा। सभी आवृत्तियों पर केवल सन्नाटा था, सिवाय एक के जिस पर कोई पुरानी दर्द भरी आवाज में भविष्यवाणी कर रहा था। उस आवाज ने बिल्कुल ठीक वही बातें कहीं जो विकास उस समय अपने कमरे में कर रहा था। विकास डर गया और उसने रेडियो का स्विच ऑफ करके सेल निकाल दिए, लेकिन फिर भी वह आवाज उसी गति से बजती रही। अचानक रेडियो से एक हाथ बाहर निकला और विकास के कंधे को कसकर पकड़ लिया। जब सुबह उसकी मां कमरे में आईं, तो रेडियो चालू था और विकास की सांसें थम चुकी थीं।

अक्सर बंद रहने वाले गोदाम का खौफ

शहर के पुराने बाजार में एक ऐसा गोदाम था जो पिछले तीस साल से हमेशा बंद रहता था। व्यापारी राघव ने सस्ते दाम मिलने पर उसे खरीद लिया और सफाई का काम शुरू किया। जैसे ही मजदूरों ने उसका भारी लोहे का दरवाजा खोला, अंदर से सड़े हुए फूलों और पुरानी धूल की तेज गंध बाहर आई। उस रात जब राघव गोदाम के कागजात देखने रुका, तो उसे कोनों से किसी के घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी। उसने हिम्मत करके टार्च की रोशनी डाली, तो हवा में तैरती हुई एक धुंधली सी आकृति नजर आई जो तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगी। डर के मारे राघव बेहोश हो गया और सुबह जब उसे होश आया, तो गोदाम का दरवाजा अंदर से बंद था और बाहर उसकी खुद की चीखने की आवाज गूंज रही थी।

रसोई से आती अजीब आवाजें

नयी नौकरी मिलने के बाद शहर के एक सुनसान इलाके में सोहन ने किराए पर एक मकान लिया। मकान बहुत सस्ता था क्योंकि उसके पिछले मालिक के साथ कुछ अनहोनी हुई थी। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर रात कोसोईघर से बर्तन गिरने की आवाजें आने लगीं। सोहन जब भी देखने जाता, वहां सब कुछ अपनी जगह पर व्यवस्थित मिलता और कोई नहीं होता। एक रात आवाजें बहुत तेज हो गईं और प्लेटें हवा में उड़ने लगीं। सोहन ने हिम्मत करके रसोई का दरवाजा खोला तो देखा कि एक धुंधली परछाई हवा में तैर रही थी। परछाई ने धीरे से मुड़कर सोहन की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर कोई आंखें नहीं थीं। उस भयानक दृश्य को देखकर सोहन बेहोश हो गया और होश आने पर उसने उसी रात वह घर हमेशा के लिए छोड़ दिया।

आईने का दूसरा किनारा

नताशा ने अपने नए किराए के घर के हॉल में एक बहुत बड़ा प्राचीन आईना लगाया था। वह रोज़ रात को सोने से पहले अपने बाल उस आईने के सामने सँवारती थी। एक रात जब वह बाल झाड़ रही थी, तो उसने गौर किया कि आईने में उसका अक्स उसकी नकल नहीं कर रहा था। बल्कि उसका अक्स उसकी तरफ देखकर एक भयानक मुस्कान बिखेर रहा था। नताशा डर के मारे पीछे हटी, लेकिन आईने के अंदर से एक हाथ बाहर आया और उसने उसका गला कसकर पकड़ लिया। अगली सुबह जब मकान मालिक आया, तो नताशा का शरीर गायब था और आईने पर खून से उसका नाम लिखा हुआ था।

सुनसान प्लेटफॉर्म की लड़की

रोहन अपनी नाइट शिफ्ट खत्म करके आखिरी लोकल ट्रेन पकड़ने रेलवे स्टेशन पहुँचा। प्लेटफॉर्म पर चारों तरफ सन्नाटा था और केवल एक मंद पीला बल्ब जल रहा था। बेंच पर एक लड़की लाल साड़ी पहने सिर झुकाए बैठी थी और लगातार रो रही थी। रोहन ने जब उससे रोने का कारण पूछने के लिए आगे कदम बढ़ाया, तो उसने देखा कि लड़की के पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए थे। तभी ट्रेन की हॉर्न की आवाज़ गूँजी और प्लेटफॉर्म की सारी लाइटें बुझ गईं। अंधेरे में जब लाइट वापस आई, तो वह लड़की सीधे रोहन के ठीक सामने खड़ी थी और उसके मुँह से खून टपक रहा था।

घड़ी की टिक-टिक और वह साया

रात के ठीक ढाई बजे थे जब विक्रम की आँख खुली। कमरे की दीवार पर टंगी पुरानी घंटी वाली घड़ी अचानक बिना चाबी के बजने लगी थी। उसकी हर टिक-टिक से ऐसा लग रहा था जैसे कोई अदृश्य इंसान कमरे के भीतर ही चल रहा हो। विक्रम ने बिस्तर से उठकर लाइट जलाई, लेकिन कमरा पूरी तरह खाली था सिवाय उस पुरानी दीवार घड़ी के। तभी उसे अपने पीछे किसी के सांस लेने की आवाज़ सुनाई दी, जो बिल्कुल उसके कान के पास थी। जैसे ही उसने मुड़कर देखा, घड़ी की सुइयां अचानक उल्टी दिशा में तेजी से घूमने लगीं और कमरे का तापमान शून्य तक गिर गया। वह समझ गया कि वह अकेला नहीं था।

कांच के पीछे का चेहरा

अमित ने अपने नए कमरे की दीवार पर एक बहुत बड़ा पुराना आईना लगवाया था, जो कबाड़खाने से बेहद सस्ती कीमत पर मिला था। शुरुआत के कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, लेकिन फिर उसने गौर किया कि आईने में दिखने वाली उसकी परछाई उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। एक रात जब वह अपने बाल सुधार रहा था, तब आईने में दिख रहे उसके अक्स ने उसकी तरफ देखकर एक खौफनाक मुस्कान दी और अपना गला धीरे से पकड़ लिया। अमित डर के मारे चीख पड़ा और उसने हथौड़ा उठाकर उस आईने पर जोरदार वार किया। जैसे ही कांच के टुकड़े बिखरे, उसके गले पर अचानक गहरे नीले निशान उभर आए और वह बेहोश हो गया।

नीली रौशनी का कुहासा

सर्दियों की एक शांत रात जब रोहन अपनी कार से सुनसान हाईवे से गुजर रहा था, तो रास्ते में अचानक एक घना नीला कुहासा छा गया। उसने देखा कि सड़क के किनारे एक महिला सफेद साड़ी में हाथ देकर लिफ्ट मांग रही थी, जिसका चेहरा बालों से पूरी तरह ढका हुआ था। रोहन ने इंसानियत दिखाते हुए कार की रफ्तार धीमी की और शीशा नीचे किया, लेकिन तभी उसे महसूस हुआ कि उस महिला के पैर जमीन से हवा में थोड़े ऊपर लटके हुए थे। डर के मारे उसने तुरंत एक्सीलेटर दबा दिया, लेकिन कार आगे बढ़ने के बजाय पीछे की तरफ खिंचने लगी। जब उसने रियर व्यू मिरर में देखा, तो वो महिला उसकी कार की पिछली सीट पर बैठी मुस्कुरा रही थी।