आत्मनिर्भर सोच

आत्मनिर्भर सोच

“
दूसरों के दम पर उड़ना छोड़ दे यार, अपनी ही ताकतों पर कर थोड़ा ऐتبار। जो खुद की आग में खुद को तपाते हैं, वही इस जहां में अपनी पहचान बनाते हैं।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)