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अडिग इरादे

अडिग इरादे

“
रास्ते में कांटे हों तो डरना कैसा, इन कानों से ही तो दामन भरना जैसा। फूलों की सेज पर तो हर कोई चल लेता है, कांटों पर चलकर ही इतिहास है बनता।
”
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