राह का सूरज

राह का सूरज

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अंधेरों से डरकर कभी जो रुक गए, वे मंज़िल की धूप को छू न सके। खुद पर रखो यकीन इतना गहरा, कि हर ठोकर भी सीढ़ी बन जाए।
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