कर्म की महिमा

कर्म की महिमा

“
किस्मत के भरोसे जो बैठे रहते हैं, हाथ उनके हमेशा खाली ही रहते हैं। कर्मवीर तो अपनी लकीरें खुद बनाते हैं, पत्थर को भी मोम वो कर दिखाते हैं।
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