सच्चा संतोष

सच्चा संतोष

“
पहाड़ियों की तलटी में एक गरीब कुम्हार रहता था जो मिट्टी के सुंदर बर्तन बनाकर अपना गुजारा करता था। वह जो भी कमाता, उसमें पूरी तरह संतुष्ट रहता था। एक दिन नगर का एक अमीर व्यापारी उसके पास आया। व्यापारी ने कुम्हार की सादगी और ख़ुशी को देखकर पूछा कि तुम इतने कम में कैसे खुश रह लेते हो? कुम्हार ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं कल की चिंता नहीं करता और आज में जीता हूँ। व्यापारी ने अपनी तिजोरी से सोने के सिक्कों की थैली निकालकर कुम्हार को दी और कहा कि इसे रखो और और अमीर बनो। कुम्हार ने पहले तो मना किया, फिर व्यापारी के ज्यादा जोर देने पर ले ली। उस रात कुम्हार को नींद नहीं आई। वह पूरी रात सोने के सिक्कों को चोरों से बचाने के लिए पहरा देता रहा। सुबह होते ही वह थक चुका था और उसकी ख़ुशी गायब हो चुकी थी। उसने तुरंत व्यापारी को सिक्के वापस लौटा दिए और कहा कि मुझे इस धन की नहीं, बल्कि उस सुकून की जरूरत है जो मेरी सादगी में था।
👁️ 1 बार पढ़ा गया ❤️ लोगों ने पसंद किया

टिप्पणियाँ

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।

लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।

संबंधित शायरी (Related Shayari)

ईमानदार कुम्हार और राजा का पुरस्कार

किसी राज्य में एक साधारण कुम्हार रहता था जिसका नाम मदन था। मदन अपनी कला में अत्यंत निपुण था और वह हमेशा मजबूत और सुंदर मिट्टी के बर्तन बनाता था। एक बार राजा ने अपने दरबार के लिए कुछ विशेष कलात्मक बर्तनों की मांग की। मदन ने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद राजा के लिए सबसे उत्कृष्ट बर्तन तैयार किए। जब वह उन्हें राजमहल ले जा रहा था, तब रास्ते में एक गरीब भूखाया यात्री मिला जो ठंड से कांप रहा था। मदन का दिल पसीज गया और उसने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा और भोजन उस यात्री को दे दिया। राजदरबार में जब उसने बर्तन प्रस्तुत किए, तो राजा उसकी कला से बहुत प्रभावित हुए। राजा ने उसे भारी मात्रा में स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार के रूप में दीं। लेकिन मदन ने केवल उतनी ही राशि स्वीकार की जितने उसके बर्तनों का वास्तविक मूल्य था, और बाकी धन राज्य के गरीबों के कल्याण के लिए वापस कर दिया। राजा उसकी इस परम ईमानदारी और परोपकार की भावना से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे राज्य का मुख्य शिल्कार घोषित किया। मदन ने साबित कर दिया कि ईमानदारी और दयालुता से बढ़कर इस दुनिया में कोई दूसरा आभूषण नहीं है।

लोभी चरवाहा और जादुई पत्थर

एक छोटे से गाँव में सोहन नाम का एक चरवाहा रहता था। वह अपनी भेड़ों को चराने के लिए प्रतिदिन दूर जंगल में जाया करता था। एक दिन, उसे जंगल में एक चमकता हुआ पत्थर मिला जिसके बारे में मान्यता थी कि वह इच्छाएं पूरी कर सकता है। सोहन ने उस पत्थर से अपार धन और महल की मांग की। रातोंरात उसका जीवन बदल गया और वह बहुत अमीर बन गया। उसके पास सब कुछ था, लेकिन उसका लालच दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही चला गया। वह अपने पुराने मित्रों और परिवार से दूर हो गया और किसी पर भरोसा नहीं करता था। धीरे-धीरे उसका अहंकार और लोभ इतना बढ़ गया कि उसने गरीबों की मदद करना बिल्कुल बंद कर दिया। एक दिन अचानक एक बड़ी आपदा आई और उसका सारा वैभव एक ही झटके में नष्ट हो गया। महल ढह गया और धन भी समाप्त हो गया। तब सोहन को समझ आया कि अत्यधिक लालच हमेशा बर्बादी का कारण बनता है। वह अपनी गलतियों पर बहुत पछताया और उसने दोबारा मेहनत से ईमानदारी का जीवन जीने का संकल्प लिया। अंततः उसने सीखा कि संतोष ही सबसे बड़ा धन है और सादा जीवन ही वास्तविक सुख देता है।

टूटे हुए कांच का टुकड़ा

एक महानगर की व्यस्त सड़क पर एक नायाब शीशे का शोरूम था। एक दिन एक सफाईकर्मी सफाई करते समय अनजाने में एक कीमती शोपीस से टकरा गया और वह नीचे गिरकर टूट गया। शोरूम का मालिक गुस्से से लाल होकर बाहर आया और उसने उस गरीब कर्मचारी को नौकरी से निकालने की धमकी दी। सहमा हुआ कर्मचारी अपने बचाव में कुछ नहीं बोल पा रहा था तभी एक अन्य वरिष्ठ ग्राहक ने आगे आकर मालिक को रोका। ग्राहक ने कहा कि गलती अनजाने में हुई है और वस्तु का बीमा होता है, लेकिन किसी गरीब की रोजी-रोटी छीनना सही नहीं है। मालिक को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने गुस्से पर काबू पाते हुए कर्मचारी को माफ कर दिया और उसे गले लगा लिया। उस दिन मालिक को समझ आया कि इंसानियत और क्षमा का भाव किसी भी वस्तु से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।

अंधेरे में जलती मशाल

एक दूरदराज के पहाड़ी इलाके में बिजली की कोई सुविधा नहीं थी। सर्दियों की एक ठंडी रात में गाँव के सभी लोग एक बड़े कमरे में जमा हुए और इस बात पर चर्चा करने लगे कि इस अंधेरे से कैसे निपटा जाए। सभी अपनी-अपनी समस्याओं का रोना रो रहे थे कि तभी एक छोटा लड़का अपने हाथ में एक छोटी सी मोमबत्ती लेकर आगे आया। उसने कहा कि दूसरों को कोसने से बेहतर है कि हम खुद एक छोटा सा दिया जलाएं। लोगों ने उसकी बात पर पहले तो हंसी उड़ाई, लेकिन जब उसने अपनी मोमबत्ती से एक बड़ा लालटेन जलाया और उससे पूरे कमरे में रोशनी फैल गई, तो सबकी आँखें खुली की खुली रह गईं। उस लड़के ने सभी को सिखाया कि संकट के समय केवल शिकायत करने से कुछ नहीं होता, बल्कि अपनी क्षमतानुसार छोटा सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकता है।