#नैतिक कहानी
हिन्दी
सच्चा संतोष
“
पहाड़ियों की तलटी में एक गरीब कुम्हार रहता था जो मिट्टी के सुंदर बर्तन बनाकर अपना गुजारा करता था। वह जो भी कमाता, उसमें पूरी तरह संतुष्ट रहता था। एक दिन नगर का एक अमीर व्यापारी उसके पास आया। व्यापारी ने कुम्हार की सादगी और ख़ुशी को देखकर पूछा कि तुम इतने कम में कैसे खुश रह लेते हो? कुम्हार ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं कल की चिंता नहीं करता और आज में जीता हूँ। व्यापारी ने अपनी तिजोरी से सोने के सिक्कों की थैली निकालकर कुम्हार को दी और कहा कि इसे रखो और और अमीर बनो। कुम्हार ने पहले तो मना किया, फिर व्यापारी के ज्यादा जोर देने पर ले ली। उस रात कुम्हार को नींद नहीं आई। वह पूरी रात सोने के सिक्कों को चोरों से बचाने के लिए पहरा देता रहा। सुबह होते ही वह थक चुका था और उसकी ख़ुशी गायब हो चुकी थी। उसने तुरंत व्यापारी को सिक्के वापस लौटा दिए और कहा कि मुझे इस धन की नहीं, बल्कि उस सुकून की जरूरत है जो मेरी सादगी में था।
👁️ 1 बार पढ़ा गया
❤️ लोगों ने पसंद किया
टिप्पणियाँ
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।