तन्हा रातें
चांदनी रातें भी अब डरावनी सी लगने लगी हैं जब से कोई अपना सपनों में आकर भी मुंह फेर लेता है। कमरा वही है पर दीवारों पर सिर्फ तुम्हारी तन्हाई का पहरा है।
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