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सांसों की उलझन

सांसों की उलझन

“
तेरी यादों का साया आज भी साथ चलता है,
अकेलेपन में हर जख्म चुपचाप जलता है।
जाने क्या बात थी उस जुदाई के लम्हे में,
कि आज भी हर लम्हा आंखों में आंसू भरता है।
”
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