जिंदगी की पहेली

जिंदगी की पहेली

“
सफर लंबा है और रास्ते अनजान हैं, हर मोड़ पर यहाँ नए इम्तिहान हैं। चलते रहो बस अपनी धुन में ए मुसाफिर, यहाँ हर चेहरे के पीछे छुपे कई अरमान हैं।
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खयालों का शहर

अपनी ही धुन में बहता चला जा रहा हूँ मैं, अनजाने सफर में कुछ कहता जा रहा हूँ मैं। भीड़ बहुत है इस दुनिया के मेलों में मगर, खुद को ही ढूंढता हुआ रहता जा रहा हूँ मैं।

बदलाव की बयार

पत्ते गिरते हैं तो शाखों को नया रंग मिलता है, हर अंधेरे के बाद ही तो नया उमंग मिलता है। यूं ही नहीं बिखरती है जिंदगी कभी यारों, संवरने का मौका भी बस तंगियों के संग मिलता है।

अंझाना मोड़

कदमों के निशान छोड़ कर आगे बढ़ चले हम, जिंदगी के हर एक इम्तिहान से लड़ चले हम। जीत की चाहत में अपनों को जो खोया कभी, उसी कसक के साथ आगे बढ़ चले हम।