#लाइफ शायरी
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जिम्मेदारियों का बोझ
“
बचपन की वो खिलखिलाहट कहीं खो गई, कंधों पर जब से जिम्मेदारियों की चादर आ गई। मुस्कुराना पड़ता है सबको खुश रखने के लिए, वर्ना अंदर तो हर शख्स की एक कहानी है।
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