झूठ का कड़वा सच
राकेश अपने विद्यालय में हमेशा अपनी झूठी शान दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें किया करता था। उसके दोस्तों को उसकी इन बातों पर हंसी आती थी, पर वह अपनी आदत से बाज नहीं आया। एक दिन उसने मजाक में एक बड़ी मुसीबत आने की झूठी अफवाह फैला दी, जिससे पूरे गाँव में हड़कंप मच गया। जब लोगों को सच्चाई का पता चला, तो सबने राकेश से दूरी बना ली और उसकी बात पर विश्वास करना हमेशा के लिए बंद कर दिया। जब सचमुच एक दिन राकेश पर संकट आया, तो उसकी मदद करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया क्योंकि सब उसका झूठ समझ बैठे थे। तब उसे समझ आया कि झूठ की नींव पर कभी विश्वास का महल नहीं टिक सकता।
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