संगीत के सुर
अमित को बचपन से ही बांसुरी बजाने का शौक था, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसके पास एक पुरानी और टूटी हुई बांसुरी थी, जिससे मधुर आवाज निकालना बेहद कठिन था। हर शाम वह गाँव के बाहर बैठकर अपनी टूटी बांसुरी से सुर साधने की कोशिश करता, और आसपास के लोग उसका मजाक उड़ाते थे। एक शाम वहाँ से एक प्रसिद्ध संगीतकार गुजर रहे थे। उन्होंने अमित की धुन में छिपे उस दर्द और सच्चे जुनून को महसूस किया। संगीतकार ने आगे बढ़कर उसे अपनी एक बेहतरीन बांसुरी भेंट की। उस दिन अमित को यकीन हो गया कि सच्ची लगन और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, बस सही समय का इंतजार करना पड़ता है।
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