वक्त का फेर
वक्त ने सिखा दिया हमें अकेले चलना, अब किसी के आने जाने से फर्क नहीं पड़ता। जख्म इतने गहरे मिले हैं इस जिंदगी से, कि अब किसी मरहम पर भरोसा नहीं होता।
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