#दर्द शायरी
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सूनी राहें
“
कदमों के निशान भी मिट गए इन रास्तों पर, जिन पर कभी हम दोनों साथ चला करते थे। आज तन्हाई ही मेरी हमसफ़र बन गई है।
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