लोहार की भट्टी और सोने का निखार
एक छोटे से गाँव में एक युवा लोहार रहता था जो अपनी किस्मत को कोसता रहता था। वह सोचता था कि उसे केवल काले कोयले और गर्म लोहे के साथ ही अपनी पूरी ज़िंदगी बितानी होगी। एक दिन गाँव में एक बूढ़ा कारीगर आया और उसने उस युवा को एक साधारण सा पत्थर दिखाया और कहा कि इसे पहचानो। युवा ने मना कर दिया क्योंकि वह सिर्फ सोना पहचानता था। बूढ़े ने समझाया कि जब तक सोना आग की भट्टी से नहीं गुजरता, तब तक वह आभूषण नहीं बन सकता। तुम्हारी ज़िंदगी की कठिनाइयाँ ही वो भट्टी हैं जो तुम्हें तराश रही हैं। इस बात ने युवा की सोच बदल दी और उसने मेहनत से काम करना शुरू किया। कुछ ही वर्षों में उसकी बनाई कलाकृतियों की गूंज दूर-दूर तक फैल गई। उसने समझ लिया कि संघर्ष के बिना असली चमक कभी हासिल नहीं हो सकती।
0