वक्त की रेत
मुठ्ठी में रेत की तरह फिसल गया हर वो रिश्ता जिसे हमने अपनी जान से ज्यादा संभाला था। चाह कर भी किसी को रोक नहीं पाए, बस हाथ की लकीरों को देखते रह गए।
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