बदले रिश्ते

बदले रिश्ते

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वक़्त के साथ लोगों के बदलते रंग देखकर अब हैरानी नहीं होती, बस खुद पर तरस आता है कि हमने गैरों को अपना समझने में उम्र गुजार दी।
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