सपनों का आशियाना
खुले आसमान के नीचे कुछ सपने सजाए हैं, हमने भी जिंदगी को अपने ढंग से जिए हैं। आंधियां रोकेगी क्या हमारी उड़ान को, हमने तो हौसलों से पर बनाए हैं।
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