सन्नाटे की गूंज
इन दीवारों से अब क्या शिकवा करें, जब अपने ही साये ने साथ छोड़ दिया। अंधेरे कमरे में बैठी यह तन्हाई, हर पुराने जख्म को फिर से कुरेद जाती है।
0