झींगा की लहरों पर लिखा नाम
झील के किनारे शाम के वक्त टहलना मेरा पुराना शौक था। उस शांत वातावरण में अक्सर मैं अपनी डायरी में कविताएं लिखा करती थी। एक शाम जब मैं अपने विचारों में खोई थी, तभी एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई और पास ही रेत पर किसी ने मेरा नाम लिख दिया। मैंने चौंककर पीछे देखा तो वहां अनिरुद्ध खड़ा था, जो पिछले कुछ दिनों से मुझे छुप-छुपकर पेंटिंग बनाते हुए देख रहा था। उसने अपने रंगों से न केवल मेरा नाम बल्कि मेरी पूरी दुनिया को खूबसूरत बना दिया। उसके बाद से झील की हर लहर हमारे प्रेम की साक्षी बन गई और हम दोनों ने एक साथ उम्र भर चलने का वादा कर लिया।
0